विशिष्ट कवयित्री :: डॉ राजवंती मान

सामर्थ्य

मुझ पर विश्वास रखो
मेरी दोस्त !
मैं तुम्हारे शिथिल / मरणासन्न
अंगों को उद्दीप्त करुँगी
करती रहूंगी
भरती रहूंगी / तुम्हारी पिचकी धमनियों में
अजर उमंगें
लहू में विबुध सरसराहटें !

सूरज का असीम प्रकाश
ढांपता रहेगा चिर ऊष्मा से
प्रदान करता रहेगा दैव उर्जा
बरबाद दिनों में !

मेरी दोस्त !
नहीं हो तुम वाणी रहित
कुछ वक्त रह सकती हो मौन
साँझ की लसलसी बेला में
कथित प्रेरकों के विरुद्ध
फीके उजालों की परतों में l

गहरी हैं तुम्हारी जड़ें
छिपी रहती हैं सारी शक्तियां वहीं
मिट्टी की अंकुआती गन्ध में
स्फूर्ति में , संतुष्टि में !

मेरी दोस्त उठो !
मेरे आह्वान पर उठो !
भव्यता, उर्वरता, चुम्बकीय शक्ति की मल्लिका !
उठो !
इस नैराश्य भरी रात को
भुला दो
अगुआई करो उनकी
जिनके उत्कर्ष और समृद्धि के
उदास बिस्तरों में
तिरोहित तिमिर
उजाले खाने को है !

यह तुम्हारा अधिकार है
मेरी दोस्त !
तुम्हारा सामर्थ्य है !!

कसक

सूख रहे हैं
शहर, शहद ,शरद
कोमल भित्ति-चित्र,
सिन्दूरी लहरें,
अमलताश के रंग;
मद्धिम हो रहे हैं वीतराग ll

कहाँ है वो गुलाब
जिसकी खुशबू
शैतान को भी हासिल है
भगवान की तरह ?

मसल रहा है
निष्ठुर स्याह आवरण
टिमटिमाते सितारे को ;
त्वचा –पत्र में दुबकी बत्तख
क्लांत आंखों से निहारती
चन्द्र कलाओं की परछाईयां
वर्षा ऋतु का इन्द्रधनुष
क्षैतिज श्रंखलाएं ll

सुन रही है
रहस्यों की दुन्दुभि
सूखी – ऐंठी कविताएँ
बगल में सोई स्वप्न लाश
जिसे वह कतई प्यार नहीं करती !!

ऐसी कसक है —
किस जादू की दीवार पर टांगू ,
या फैला दूँ कौन से चिनार पर ?
छोड़ दूँ किस चिनाब में;
कि गा सके ?
नव भोर के
वेला-गीत !!!

यात्रावृतांत

उठो कनिका !
नहा लो
कर दो इस पानी को सुनहला
जंचता नही ये आलसी लिबास तुम पर
कर दो दफन इसे
कहीं गहरे , बहुत गहरे l

कुतर देता है ये
रंगीन पंख
और सुंदर कलगी भी
जो उग रही है मस्तक पर !

हां, सच है
दमघोटू राख की बादशाहत
लिपट जाती है परिधान से
सीने को बींध देती है चक्रव्यूह में
खेंच देती है लक्ष्मण रेखाएं !

मगर , धैर्यवती !
तुम्हारा ये गुलाबी मनफूल
भूरे त्वचापर्ण लिफाफे में
महक रहा है अभी
सिन्दूरी किरण को देख कर !

सो उठो !
तराश लो अपनी कलम
और लिख दो उस आसमानी चादर पर
स्वर्ण जड़ित अक्षरों में
अपना यात्रावृतांत !
………………………………………………………..
परिचय : डॉ राजवंती मान लेखिका, कवयित्री व शोधकर्ता तथा अभिलेख संयोजिका हैं.
इनका कई काव्य-संग्रह और यात्रा-वृतांत प्रकाशित हो चुका है.
पता : डॉ राजवंती मान, फ्लैट न० एफ 2 /301, माया गार्डन सिटी, अम्बाला रोड जीरकपुर, पंजाब 140603
मोबाइल नं : 9814676936
ईमेल : dr.rajwantimann@gmail.com

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