कर्तव्य पथ
                  – माधवी चौधरी
कल से ही अमृत की तबीयत फिर खराब थी । नीलम परेशान क्या करे और क्या न करे। एन एम का आर्डर है कि गाँव में अगर किसी का भी रिश्तेदार बाहर से आए हों तो उसके बारे में पूरी जानकारी दें। गाँव की ‘आशा’  होने के कारण नीलम को कई बार घर से निकलना पडता। उसके क्षेत्र में दो प्रेग्नेंसी का भी केस है। हर जगह उसे ही देखना है। घर में सास- ससुर  और एक बेटा…… घर का काम….. एक गाय और अब बीमार पति…… जेठ – जेठानी अलग हैं…. अमृत की खराब तबियत ने उन्हें और अलग – थलग कर दिया था। आते-जाते वह लोगों की कानाफूसी सुनती और मन मार कर रह जाती। पता नहीं कहाँ से यह काल  ‘कोरोना’ आ गया है। अच्छा – भला सबकुछ चल रहा था कि सब उथल-पुथल हो गया। ऊपर से सास के ताने….. हाथ पैर नहीं हिला पाती हैं पर जुबान चौबीस घंटे चलती रहती है।।
सोचते सोचते नीलम का दिमाग सांय सांय करने लगा। क्या  अमृत को कोरोना…… नहीं… नहीं…..
उफ्फ यह क्या सोच रही है नीलम। कोरोना से तो लोगों का बचना…. ओह फिर… यह दिमाग भी न…. पता नहीं क्या अनाप-शनाप सोचने लगता है। कुछ नहीं हुआ मेरे अमृत को…..  बुदबुदाते हुए उसने गर्म पानी ग्लास में लिया और अमृत की ओर बढी। अमृत तैयार था। नीलम ने उसे पानी दिया और उसे सहारा देकर रिक्शे की ओर बढी।  अमृत को साँस लेने में कठिनाई हो रही देख कर रिक्शेवाले ने कहा, ‘ बहू जी…. मालिक को दूसरी बीमारी तो नहीं हो गई? और साथ ही उसने गमछा अपने नाक पर रक्षा कवच की भांति लपेट लिया। रिक्शेवाले की बातें सुन सास जो अब तक धीमी आवाज में बोल रही थीं…. उनका सुर ऊँचा हो गया….. अरे बेटा…. ठीक कहते हो…. हमरे अमरीत को चीनी बेमारी लगा दी है ई कलमुंही….. पता नहीं कहाँ कहाँ से घूम घूम कर लाई है ई बेमारी। अपने तो पट्ठा की तरह घूमते रहती है हमरे अमरीतवा को जानमारू रोग लाकर धर दी। फिलटा घूमना चाहती है। इसलिए चाहती है कि अमरीतवा परलोक सिधार जाए….
वे और कुछ बोलती कि तेज आवाज में अमृत ने   माँ को डाँटते हुए चुप रहने के लिए कहा।
माँ भुनभुनाती रही।
 नीलम के प्राण हलक में आ गए। नहीं… नहीं भाई…. ऐसा कुछ भी नहीं है। आप तो जानते ही हैं कि इनको ऐसा पहले भी कई बार होता रहा है।  कहते कहते सहारा देकर अमृत को रिक्शे पर बैठा कर स्वयं उसकी बगल में बैठ गई। रिक्शेवाले ने रिक्शे को अछूत की तरह पकड़ा और चल दिया।  नीलम कहती रहीं कि जल्दी पहुंचना है रिक्शे पर बैठ कर चलाए पर रिक्शेवाले ने मानो रिक्शे पर न बैठने की  भी कसम खा रखी थी और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की भी। राम राम करके नीलम अस्पताल पहुंची तो वहां दूसरा ही तमाशा था। हर स्टाफ उसे आड़े हाथों ले रहा था। नीलम जी…. आप जानती हैं कैसी हवा चल रही है फिर भी आप इन्हें अब अस्पताल ला रही हैं। इनकी तो सांस फुल रही है। लगता है पूरा इंफेक्शन हो गया है। नीलम प्रयास करके भी नहीं समझा पाई कि यह अमृत का पुराना रोग है।  बल्कि अस्पताल के स्टाफ ने ही उसे समझा दिया कि यह कोरोना का आखिरी स्टेज है। हताश नीलम के दिमाग ने मानों काम करना बंद कर दिया था। थोड़ी देर बाद एक नर्स ने आकर कहा कि नीलम को भी कोरोना वायरस की जाँच करवानी होगी और अस्पताल में ही रहना होगा। नीलम चौंक उठी…. क्यों…. मुझे क्या हुआ।
आश्चर्य की बात है नीलम जी। आप एक जिम्मेदार स्टाफ होकर ऐसा पूछ रही हैं?……. दूसरी नर्स ने कहा और उसे जाँच के लिए तैयार होना पड़ा।  बस एक फोन कर पाई घर में जेठानी को कि बेटे और सास ससुर को भोजन दे दें और गाय को चारा भी।
मानो बम विस्फोट सा हो गया।  जेठानी की बातें नहीं सुन पाई और फोन रख दिया उसने। मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की कि वे ही अब सहाय हों। विभिन्न प्रकार की खानापूर्ति में पांच दिन निकल गए। पता चला कि नीलम को कोरोना पाजिटिव नहीं है । जान में जान आई । अमृत के कुछ और जाँच होने हैं इसलिए नीलम अकेली घर आई। हर तरफ एक वीरानगी सी थी।  बेटा दौड़ कर उससे लिपटना ही चाहता था कि एक मजबूत हाथ ने उसे रोक दिया। रूक…. रोग लगाएगा क्या ❓
नीलम के जेठ थे। नीलम ने सर पर आँचल ठीक करते हुए कहा, ‘ भैया जाँच में कुछ नहीं निकला….
 हाँ…. हाँ ठीक है…. तैयो परहेज जरूरी है। बहुत से लोग में ये रोग देरी से लच्छन दिखाता है।  कोई मानने को तैयार न था कि जब अमृत को कोरोना है तो नीलम को कैसे नहीं होगा।
नीलम विवश सी आगे बढ़ी। बहुत सा काम निपटाना है उसे फिर परसों अमृत का सारा जाँच रिपोर्ट भी आ जाएगा। नीलम ने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना किया और सबके मना करने के बावजूद वह काम में जुट गई। दो ढाई घंटे में उसने घर को घर जैसा फिर से बना लिया। शाम हो गई थी। दो चार पास पड़ोस की महिलाएं हालचाल पूछने आई ही थी कि सास ने रोना और विलाप करना शुरु कर दिया कि करमजली के कारण ही आज उसका बेटा इस रोग का सीकार हो गया है।
नीलम का मुँह कसैला हो गया।
कैसे कैसे लोग हैं। क्या इन महिलाओं को नहीं पता कि विवाह के पूर्व से ही अमृत को साँस की बीमारी है। फिर भी रस ले रही हैं और हाँ में हाँ मिला कर उसे करमजली साबित करने पर तुली हैं।।
गाय को चारा जेठ ने नहीं देने दिया कि गाय रोग से प्रभावित हो कर मर गई तो उन्हें भी गोहत्या का पाप लगेगा।।
चलो इसी बहाने थोड़ा काम हल्का हुआ पर बेटे को कलेजे से लगाने के लिए वह व्याकुल थी पर……
                     आज  उसने सभी देवी-देवताओं  को पूजा और पूरी तरह से तैयार होकर अस्पताल जाने के लिए निकली जहां एक अकेले रूम में अमृत को रखा गया था।
अस्पताल में भी सभी स्टाफ उससे बचने की कोशिश कर रहे थे। नीलम को अभी इन बातों से कोई सरोकार न था वह तो जानने के लिए व्याकुल थी कि अमृत के जाँच का क्या रिपोर्ट आया। दरवाजे के शीशे से उसने अमृत को देखा। आधा हो गया है। आँखे भर आई नीलम की। तुम्हें कुछ नहीं होगा अमृत। अगर जाँच में कोरोना निकला तो कोरोना हारेगा….
 नीलम जी आप जाकर डाक्टर से मिल लीजिए। नीलम घूमी। उसकी सहकर्मी मीना थी।
नीलम जब डाक्टर के रूम से निकली उसका चेहरा दिप दिप कर रहा था मानों उसने कोई किला जीत लिया हो।
 डाक्टर ने कुछ आवश्यक दवाइयाँ देते हुए बताया कि अमृत कोरोना पाजिटिव नहीं है ।
नीलम अमृत के साथ घर पहुंची। सास का भुनभुनाना चालू था। उसने अमृत को नहवाकर  नाश्ता दिया और दवाई देकर बेड पर आराम करने के लिए लिटा  वह स्वयं  रात में डिटाल से धुले मास्क व दास्ताने पहन कर रेडी हो गई अपने कर्तव्य पथ के लिए……

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परिचय : माधवी चौधरी की कई कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं

निवास : भागलपुर, बिहार

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