ग़ज़ल

1

अब न संभले हम यहां तो जलजला हो जाएगा

आदमी से आदमी का फासला हो जाएगा

 

क्यों कही यूं शायरी में बात सच्ची आपने,

देख लेना अब नया ही मामला हो जाएगा

 

अपने दिल में घर बनाया मैंने तेरे वास्ते,

तेरे दिल में मैं रहूं तो क्या भला हो जाएगा ?

 

कर रहे हो बात मुझको यूं मिटाने की यहां ?

आ कभी मैदान में फिर फैसला हो जाएगा

 

स्याह अंधेरा दिखे है क्यूं मुझे अब गाँव में ?

क्या यहां भी नफरतों का दाखिला हो जाएगा।

 

ख़्वाब में भी ये कभी “अविनाश” सोचा मैं न था,

देश से ऊँचा धरम का वलवला हो जाएगा

 

2

पिता की जेब देखें और मेला छोड़ देते हैं,

फकीरी में यहां बच्चे यूं खेला छोड़ देते हैं

 

खुशी क्या है यहां गम क्या पता उसको कहां यारों,

जमाने में जिसे अपने जो तन्हा छोड़ देते हैं

 

मिले हो तुम अगर जिसको किसी दर पे वो क्यूं जाए ?

मोहब्बत की करें बातें झमेला छोड़ देते हैं

 

न आया बेटियों के हाल पर अब तक तरस जिसको,

वतन उसके भरोसे हम ये अपना छोड़ देते हैं

 

सुना है लोग करते हैं बहुत ही याद शिद्दत से,

चलो हम भी खुशी से यह जमाना छोड़ देते हैं

 

बनाता है यहां जो काफिला “अविनाश” मेहनत से,

उसी को काफिले वाले अकेला छोड़ देते हैं

 

 

 

By admin

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