मेरी जागीर
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मेरी जागीर मेरे इस वतन की हर निशानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
जहाँ मस्जिद अज़ानो से गूँजती हो सुबह रातें
वहीं मंदिर की घंटी में भी गूंजे मंत्र वाणी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
यहाँ की मिट्टी है सोना उगे खेतों में नगीना
ताल में लहलहाते धान की अपनी कहानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
उस हिमालय से मचलती हुई दरिया जो निकलती
महज़ जल ही नहीं अमृत लिए गंगा का पानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
जो अभावों में हैं पलते वो ही किस्मत भी बदलते
देश के वास्ते उन नायकों की ज़िन्दगानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
खड़े हैं हिन्द के बांके,सरहदों पे टिकी आँखें
हाँ इसी, सरज़मी के वास्ते उनकी ज़वानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
भले सांपो-सपेरों की, मगर भूमि है वीरों की
यहाँ राजा बलि और कर्ण सा सर्वस्व दानी है.
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
जो रंगो से रंगी होली, सजी दीपों से दीवाली
यूंही उत्सव की मस्ती में गुज़रती जिंदगानी है
हमारे देश की मैं ही नहीं दुनिया दिवानी है
लता सिन्हा ज्योतिर्मय
मुजफ्फरपुर
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नाम: लता सिन्हा ‘ज्योतिर्मय’
कवियित्री
w/o मनोरंजन श्रीवास्तव
शिक्षा:- एम.ए.(इतिहास)भागलपुर विश्व विद्यालय
कार्य क्षेत्र: (विविध भारती), उद्घोषिका, आकाशवाणी पटना, एवं दूरदर्शन पटना
जन्म स्थान:- लखनऊ
कृतियाँ:- दो काव्य-संग्रह प्रकाशित
१. “मेरा अंतर्मन” (महादेवी वर्मा सम्मान)
२. “अब शैय्या शेष की त्याग”
सम्मान:-
‘शारदा सुता सम्मान’, हिन्दी भाषा साहित्य परिषद, दिल्ली
‘महादेवी वर्मा सम्मान’, हिन्दी भाषा साहित्य परिषद, खगड़िया बिहार
महिला एवं बाल विकास, दिल्ली द्वारा  ‘राष्ट्रीय सम्मान’
लेखन विधा:- मुख्यतः ओज, अध्यात्म एवं प्राकृतिक श्रृंगार के गीत व कवि

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