खास कलम : अंजना झा

मेरे घर का कचरा

आज बहुत ज्यादा परेशान थी मैं
क्योंकि
नहीं उठेगा आज
मेरे घर का कचरा
वाकई
हैरान थी मैं।।
कल ही तो आए थे
गोधूलि बेला में
जीर्ण काया उदास आंखें
क्षीण स्वर संग
गली के हर द्वार पर
अपने हाथ फैलाकर
मांग रहे थे अपना मेहनताना
ताकि पत्नी के निर्जला व्रत को
खुलवा सको मीठे पकवानों से
जो किया था उसने तुम्हारी
चिरायु के लिए।
फिर कैसे चिरनिद्रा में
अमूक बन सो गए तुम।
वाकई परेशान हूँ मैं
क्योंकि
नहीं उठेगा आज
मेरे घर का कचरा।
मर्मभेदी स्वर गुंजायमान
हो रहा है गली में
अश्रुपुरित नयन से
पैबंद युक्त आंचल फैलाकर
मांग रही अग्रिम मेहनताना
तुम्हारे देह की मुक्ति हेतु
तुम्हारी अर्धांगिनी।।
वाकई परेशान हूँ मैं
क्योंकि
नहीं उठेगा आज
मेरे घर का कचरा।
स्वर्गाश्रम के चहुँओर
बिलखते स्वर में
राहगीरों से गुहार लगा रहे
तेरे कलेजे के टुकड़े
ताकि मिल जाए तुझे
जीवन के नरक से मुक्ति
और स्वर्ग की ओर प्रस्थान
हो चुकी तेरी आत्मा को
मुक्त कर दे ये मानव तन।।
वाकई परेशान हूँ मैं
क्योंकि नहीं उठेगा आज
मेरे घर का कचरा।।
सूर्योदय होते ही तुम्हारी कर्णभेदी
आवाज भी सुकून पहुंचाती थी
घर की गंदगी गाड़ी में समेट
ले जाते थे।
स्वच्छ हो जाता हमारा घर
आज बदबू ना फैले इसलिए
समेट कर छज्जे पर रख आई मैं
वाकई हताश हूँ मैं
क्योंकि नहीं उठेगा आज मेरे
घर का कचरा।
अहसान करते हुए भी
निरीह लगते थे तुम
पैसे पकड़ाते हुए सबलता
प्रदर्शित करते थे हम।
हमारी गंदगी में ढूंढ लेते थे
अपने घर ले जाने की वस्तु
आश्चर्य होता था कैसे और कहां
साफ कर देते थे हमारी गंदगी
और आह्लादित कर देते थे
उन स्वच्छ वस्तुओं से
अपने स्वजनों को
वाकई निःशब्द हूँ मैं
क्योंकि नहीं उठेगा आज
मेरे घर का कचरा।
सर्व विदित है नहीं जाएगी कोई हस्ती
तुम्हारे शवदाह में
नहीं होगी तेरहवीं की भोज
तुम्हारे सम्मान में
नहीं मिलेगा तुम्हारे वारिस को
कोई अनुदान
कल से पुनः शुरू हो जाएगी
नियमित दिनचर्या
निर्जीव काया से खिंचेगी
तेरी भार्या गाड़ी
नन्हे हाथों से समेटेंगे
तेरे मासूम सारा कचरा
वाकई सुकून में हूँ मैं
क्योंकि
कल से पुनः उठेगा मेरे
घर का कचरा।
घर में रखी गंदगी है शोर मचा रही
महान थे तुम उन तथाकथित
प्रवचन कर्ताओं से
मूक रहकर तुम स्वच्छ संदेश दे गए
तुम्हें लेने आएंगे देवाधिदेव
उस चढावे की पुण्यराशि संग
जो समर्पित कर आते हम
धर्म के स्थानों पर
इस अंतःस्थ विचार से
आज थोड़ी शांत हूँ मैं
क्योंकि बस आज के बाद
तुम्हें मोक्ष मिलते ही
पुनः कल से उठेगा
तुम्हारी ही गाड़ी में
मेरे घर का कचरा।।
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परिचय : कवियित्री की कविताएं कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं

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