श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी /गीतों से नमन :: दीपक

मन को अपने चमन कर लें।
अमन को हम नमन कर लें।

अभी तो चमकना था ये ललाट अम्बर तक
नयन ये जोहते रहते तुम्हारी बाट अम्बर तक
खामोश अँधियारा हुआ सन्नाट अम्बर तक
जाना है तुम्हारे पास इसको काट अम्बर तक

हृदय अब धीर हम धर लें
गमन को हम सहन कर लें

मन को अपने चमन कर लें।
अमन को हम नमन कर लें।।१।।

तुम्हारी जिन्दगी एक गीत तुम्हारी याद एक ग़ज़ल
रहे कुछ प्रश्न अन-सुलझे उन्हीं का ढ़ूढ़ते हैं हल
असमय छीनकर तुमको समय ने जो किया छल
तुम्हारी छवि बसी मन में आती याद है प्रतिपल

दर्द यह हम वहन कर लें
सजल अब हम नयन कर लें

मन को अपने चमन कर लें।
अमन को हम नमन कर लें।।२।।

जरा सी देर में अपनत्व के वो बीज बो जाना
जगाकर नींद से हमको और स्वयं सो जाना
तुम्हारा इस तरह से मिलना और खो जाना
उसे भी तुम लगे प्यारे हुआ है स्वर्ग को जाना

दुखों का हम दमन कर लें।
रतन का हम चयन कर लें।

मन को अपने चमन कर लें।
अमन को हम नमन कर लें।।३।।

जमाना दे जमाने तक एक ऐसी ‘दा़द़’ बन जाये
तुम्हारी सामने ना हो सकी तुम्हारे बाद बन जाये
मेरे मन का कोई सम्बल तुम्हारी याद बन जाये
सृजन को जो करे उर्वर, वो ऐसी खाद बन जाये

सोच अब हम गहन कर लें।
चलो फिर हम मनन कर लें।

मन को अपने चमन कर लें।
अमन को हम नमन कर लें।।४।।

– कुमार-‘दीपक’, आगरा

 

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