श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ यादें :: सतरूपा

अभी 23 सितम्बर को युवा कवि अमन चांदपुरी पुस्तकमेला परिसर के मंच पर #गीतिका सौरभ सम्मान से सम्मानित हुए थे।
असमय लगातार बारिश से सांस्कृतिक पंडाल परिसर थोड़ा बहुत अस्तव्यस्त था बावजूद समर्पित युवा से लेकर वरिष्ठ साहित्यकार सभी की मौजूदगी खूब रही। उसी दिन ही दूसरे पंडाल में युवाओं का पोएट्स हाऊस कार्यक्रम चल रहा था, मै वहां पहुंच चुकी थी। मंच की व्यवस्था , गीली कुर्सियों आदि को ठीक ठाक करके कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के तौर पर मै जब बैठी तो देखा दूसरे पंडाल की ओर से अमन चांद पूरी विपिन मलीहाबादी जी के साथ आए और थोड़ी देर तक रुककर मंच को देखा सुना। काव्यपाठ की गतिबाधा ना हो इस लिए ना ही वो मेरे पास आ सका ना मै उसे मिलकर कुछ बोल पाई बस उसकी चरपरिचित मीठी सी मुस्कान वाला अभिवादन मुझे देकर वो चला गया। कार्यक्रम होता रहा… बड़े पंडाल में कार्यक्रम में जहां उनको साहित्य सम्मान मिलना था शायद वहां कुछ व्यवस्था के क्रम में अमन को कुछ समय और मिला होगा क्योंकि वो महज कुछ ही देर में फिर लौट आया और युवा शायरों को खड़े खड़े सुना। मै ये सब देखकर बहुत खुश थी कि अमन इन उभरते कलमकारों में रुचि रखते हैं। बेहतरीन शायर और हिंदी के दोहों के राजा अमन का साहित्य प्रेम उनको मंच के करीब खीच लाता था। कल्पना ही नहीं थी कि ये आखिरी मुलाकात है , 23 सितम्बर के बाद मै अपने युवा कलमकार बहुत विनम्र मिलनसार भाई अमन को फिर कभी मंच पर नहीं देख सकूंगी, मै अंतिम बार उसको देख रही हूं…वो चित्र मेरे सामने बार बार आ रहा है।
विभिन्न मंचों पर हम सब साथ थे अब वो जगह हमेशा खाली रहेगी।
उसकी ताली उसकी दाद उसकी आवाज़ उसकी ज़िंदादिली को खो दिया हमने।
याद आती है पहली मुलाक़ात —
यूपी प्रेसक्लब में एक किशोर माइक पर एक कागज पकड़े आया और पढ़ना शुरू किया –

अमन तुम्हारी चिट्ठियां मै रख सकूं संभाल।
इसीलिए संदूक से गहने दिए निकाल।।

मैं मंत्रमुग्ध सुनती रही इतनी कम अवस्था में दोहे पर इतनी पकड़ .. फिर उस किशोर ने कुछ शेर पढ़े जोकि नायाब थे और उनकी उम्र को देखते हुए ताज्जुब की बात भी… तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मैंने पास बैठे श्री राजेन्द्र पंडित जी से पूछा ये बालक कौन है वो बोले ये अमन चांदपुरी है ,हिंदी कविता दोहा विधा पारंगत है।
निश्चित रूप से प्रतिभा और ख्याति उम्र की मोहताज नहीं होती ये अमन ने चरित्रार्थ किया है।
गोष्ठी संपन्न होने बाद मुलाकातों के बीच अमन पास आए बोले, दीदी प्रणाम कैसा लगा मेरा काव्यपाठ। मै अभिभूत बोली दिव्य हो अमन , मैंने पूरा वीडियो बनाया है आपका नंबर देना भेजूंगी।
भोला भाला बालक अपनी चमकती आंखों में आदर और स्वाभिमान के साथ मुझे प्रेसक्लब के गेट तक छोड़ने आया।
तब से आज तक उसके दिए आदर और उसके काव्य सृजन पर फूली नहीं समाती थी।
देश को एक बड़ा साहित्यकार मिल रहा था , लखनऊ को एक बड़ा काव्ययोगी मिल रहा था, अम्बेडकर नगर को उसके लाल का साहित्य परचम उच्च शिखर पर लहराता दिख रहा था कि अचानक…
मंच से अस्पताल के बीच बस 5 -7 दिन में सब खत्म हो गया।
कार्यक्रमों की भागमभाग के बीच 30 सितम्बर रात 9 के आसपास ग्रुप में अमन का msg देखा जिसमें उसने डेंगू होने और गांव से लखनऊ ट्रामा रेफर की सूचना और शुभचिंतकों से ट्रामा में रक्त आदि के सब इंतजाम करने की अपील की।
सभी अपने अपने स्तर से तुरंत सक्रिय हो गए, खून की व्यवस्था में जब हम लोग लगे थे तो पूरा विश्वास था कि जल्द ही वो ठीक हो जाएगा, मृत्यु की तो कल्पना भी नहीं थी।
कितने असाध्य रोगों पर विज्ञान की विजय है ये डेंगू था जिससे लड़ने के लिए अमन के साथ सब लोग थे।इतने आत्मीय लोग अथक प्रयासरत रहे फिर भी प्रिय अमन डेंगू के क्रूर चंगुल से कभी छूटता कभी उसपर काल का शिकंजा और कसता।
25 वर्षीय अमन का जीवन सांप सीढ़ी की तरह अप एंड डाऊन होता रहा, दवाएं आशाए दुआएं प्रार्थनाएं चलती रही लेकिन कोई भी उसको दुनिया में रोक नहीं पाया।
नियति के आगे सब मजबूर अब असाध्य हुआ ।
ईश्वर आपके रहस्य हम नहीं जानते … एक जवान ओजस्वी प्रतिभावान संतान की मृत्यु से उनके माता पिता पर क्या बीत रही होगी ये समझ सकती हूं।
हे प्रभु अब ऐसे अनर्थ किसी को कभी ना दिखाना 😭
अमन को अपने चरणों में स्थान देना और उनके लिखे साहित्य को दुनिया में अमर करना।
नौजवानी भारत की हमेशा से इतिहास में दर्ज है जिनमे उम्र छोटी लेकिन धन्य कर्म इतने बड़े की जीवन सार्थक करके अमरत्व पाया , निश्चित रूप में आपने वो सार्थक नौजवानी जिया है।
अमन आप साहित्य जगत के युवा गौरव हो हम सबआपको कभी नहीं भूल पाएंगे अनुज .. जहां हो खुश रहना बच्चे । भावभीनी श्रद्धांजली ॐ शांति
#यादें #अमन_अमर_हैं
युवा अमन चांदपुरी रक्तदान में हमेशा अग्रणीय रहे और जीवन विडंबना देखिए उनके अंतिम समय में उनके लिए रक्त के दान की बहुत जरूरत पड़ी .. यथासंभव खून मिला भी…. पर वो संसार छोड़ गया ये कह कर –
रक्तदान महादान है ये दान करने में देर ना करना
इंसान यही विवश है दूसरों पर निर्भर है, मानवता के साथ उदार बनें सहायक बनें।
अमन आपको नमन करती है आपकी दीदी
💐भावभीनी श्रद्धांजलि
अमन की अंतिम पोस्ट गज़ल में उसने ज़िन्दगी से लड़ाई का ज़िक्र किया _____

ग़ज़ल/غزل

तीरगी से बच गए तो रौशनी लड़ने लगी
क्या बताऊँ मुझसे मेरी ज़िन्दगी लड़ने लगी

تیرگی سے بچ گئے تو روشنی لڑنے لگی
کیا بتاؤں مجھسے میری زندگی لڑنے لگی

By admin

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