विशिष्ट ग़ज़लकार : डी.एम. मिश्र

1
यूं अचानक हुक्म आया लाकडाउन हो गया
यार से  मिल भी न पाया लाकडाउन हो गया
बंद पिंजरे में किसी मजबूर पंछी की तरह
दिल हमारा फड़फड़ाया लाकडाउन हो गया
घर के बाहर है कोरोना, घर के भीतर भूख है
मौत का कैसा ये साया लाकडाउन हो गया
गांव से लेकर शहर तक हर सड़क वीरान है
किसने ये दिन है दिखाया लाकडाउन हो गया
किसकी ये शैतानी माया, किसने ये साजिश रची
किसने है ये जुल्म ढाया लाकडाउन हो गया
ज्यों सुना टीवी पे कोरोना से फिर इतने मरे
झट से दरवाजा सटाया लाकडाउन हो गया
कल लगाता था गले अब छू नहीं सकता उन्हें
मुश्किलों का दौर आया लाकडाउन हो गया
2
दाना डाल रहा चिड़ियों को मगर शिकारी है
आग  लगाने   वाला  पानी का व्यापारी  है
मछुआरे की नीयत खोटी तब वो समझ सकी
जब कंटिया में हाय फँसी मछली बेचारी  है
लोग कबूतर बनकर खाली टुक -टुक ताक रहे
उसकी जुमलेबाज़ी में कितनी मक्कारी है
रंग बदलने वाली उसकी फ़ितरत भी देखी
वो गिरगिट सा मतलब से ही रखता यारी  है
यारो मरने की ख़ातिर तो दहशत ही काफ़ी
मान लिया कोरोना इक घातक बीमारी  है
काँटे अपने आप उगे हैं होगी बात  सही
फिर भी माली की भी तो कुछ जिम्मेदारी है
दिल के भीतर ज़हर भरा हो यह भी हो सकता
लोग यही बस देख रहे हैं सूरत प्यारी  है
3
पर्वत जैसे लगते हैं बेकार के दिन
हम भी काट रहे हैं कारागार के दिन
रोशनदानों पर मकड़ी के जाले हैं
उतर गये हैं भीतर तक अंधियार के दिन
मैंने  पूछा कब तक देखूं चांद तुझे
वो बोला जब तक हैं ये दीदार के दिन
चारों तरफ़ दिखे केवल कोरोना ही
कितने दर्दीले हैं ये संहार के दिन
लाशों के अंबार लगे हैं दुनिया में
देख लिये दुनिया ने हाहाकार के दिन
कान फटे जाते है झूठे बोलों से
याद बहुत आते हैं वो ऐतबार के दिन
मन में यह विश्वास हमारे है लेकिन
जल्दी ही लौटेंगे फिर से प्यार के दिन
4
छूट गया घर तब जाना घर क्या होता है ॽ
कोरोना ने दिखलाया डर क्या होता है ॽ
सारे सपने मेरे भी हो जाते पूरे
चूक गया तब जाना अवसर क्या होता है ॽ
बचपन में मैंने भी मूरत पूजा की है
ठोकर खाकर जाना पत्थर क्या होता है ॽ
ठेकेदारों और कहीं जाओ तो अच्छा
मुझको है मालूम कि ईश्वर क्या होता है ॽ
 भटक गया मंज़िल से तब एहसास हुआ
राह दिखाने वाला रहबर क्या होता है ॽ
आप नहीं समझेंगे भीतर की ज्वाला को
आग न बुझ पाये  तो रोकर क्या होता है ॽ
साथ रहा वो जब तक उसकी कद्र नहीं की
बिछड़ गया तो समझा दिलबर क्या होता है ॽ
जिनके खेतों में उगती है सिर्फ निराशा
उनसे जाकर पूछो बंजर क्या होता है ॽ

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परिचय : डी.एम.मिश्र चर्चित ग़ज़लकार हैं. इनकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं

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