विशिष्ट गीतकार : डॉ. राम वल्लभ आचार्य

1
मन में इतनी उलझन

मन में इतनी उलझन
जितने सघन सतपुड़ा वाले वन,
हल्दीघाटी हुई जि़ंदगी
चेरापूंजी हुए नयन ।

जयपुर जैसे लाल गुलाबी
रहे देखते हम सपने,
लेकिन चम्बल के बीहड़ से
रहे गुजरते दिन अपने,
कब से प्यास संजोये बैठा
बाढ़मेर सा व्याकुल मन

दिल्ली जैसा दिल बेचारा
जीवन प्रश्नों से जूझे,
उत्तर किन्तु अबूझमाड़ से
रहे अभी तक अनबूझे,
पीड़ायें नित रास रचातीं
समझ हृदय को वृन्दावन

चाहा बहुत. मगर. अाशायें
शांति निकेतन बनीं नहीं,
चैन हृदय का हुआ. गोधरा
जिसने खुशियाँ जनीं नहीं,
इच्छाएँ हरसूद हो गईं
उजड़ा जिनका घर अांगन

2
अाँगन की ढिंग बने

बन न सके हम ”अहा”
सदा ही ”उई” रहे

बागड़ बनकर. रहे
मगर छँटते आये
बढ़ना चाहा बहुत
मगर घटते आये
बन न सके तलवार
सदा ही सुई रहे

रहे स्वयं तम में
लेकिन उजियार किया
अपने दुश्मन को भी
हमने प्यार दिया
बाती बनकर जले
सदा ही रुई रहे

धरती छोड़ी नहीं
न रहे बिछौनों में
घर में जगह बनाई
लेकिन कोनों में
आँगन की ढिंग बने
सदा ही छुई रहे

नहीं किसी को भी
हमने दूजा समझा
करना ही सत्कार
सदा पूजा समझा
होकर भी एकात्म
सदा ही दुई रहे

3
मन में इतनी उलझन

मन में इतनी उलझन
जितने सघन सतपुड़ा वाले वन,
हल्दीघाटी हुई जि़ंदगी
चेरापूंजी हुए नयन

जयपुर जैसे लाल गुलाबी
रहे देखते हम सपने,
लेकिन चम्बल के बीहड़ से
रहे गुजरते दिन अपने,
कब से प्यास संजोये बैठा
बाढ़मेर सा व्याकुल मन

दिल्ली जैसा दिल बेचारा
जीवन प्रश्नों से जूझे,
उत्तर किन्तु अबूझमाड़ से
रहे अभी तक अनबूझे,
पीड़ायें नित रास रचातीं
समझ हृदय को वृन्दावन

चाहा बहुत. मगर. अाशायें
शांति निकेतन बनीं नहीं,
चैन हृदय का हुआ. गोधरा
जिसने खुशियाँ जनीं नहीं,
इच्छाएँ हरसूद हो गईं
उजड़ा जिनका घर अांगन

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परिचय : डाॅ. राम वल्लभ आचार्य की कई कृतियां प्रकाशित हैं.
इनके गीतों को अनूप जलोटा, रूप कुमार राठौर, उदित नारायण, अनुराधा पौड़वाल, घनश्याम वासवानी, कल्याण सेन सहित अनेक गायकों ने आवाज दी है. इन्हें अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान, तुलसी साहित्य सम्मान, पवैया परस्कार सहित अनेक सम्मान मिल चुके हैं.
सपंर्क – 101,रोहित नगर फेस-1 बावड़िया कला, भोपाल म. प्र. 462.039 (निवास)

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