माँ
– योगिता ‘जीनत’

जब मैंने अपने अधरों से
पहली बार कहा था माँ ,
तेरी अँखियों से ममता का
कितना नीर बहा था माँ ।

 

पहली बार चली मैं डगभर
तू कितना घबराई थी ,
मुझे गोद में लेने को तू
दौड़ी – दौड़ी आई थी ,
तेरी इस निश्छल ममता को
ये मन समझ रहा था माँ ।

जब मैंने अपने अधरों से पहली बार कहा था माँ…!

अपने सब सुख देकर मुझको
नाज़ों – नाज़ों पाला है ,
क़दम – क़दम पर बनी सहारा
रह – रह मुझे सँभाला है ,
जब – जब साया साथ नहीं था
तेरा हाथ गहा था माँ ।

जब मैंने अपने अधरों से पहली बार कहा था मां…!

 

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