अहसास का बंधन

वेे अतीत के पल भी कितने सुनहरे थे। चुपके -चुपके मिलना ,माता-पिता का डर , समाज का डर । वो पहली बारिश में हमारा मिलना , तुम्हारे सुंदर बदन पर बारिश की फुहार का मोतियों – सा थोड़ी देर के लिए जमना। वो प्यारी -प्यारी बातें ! कभी -कभी
नाराज़ होना ,मेरा तुम्हें मनाना। विपरीत परिस्थितियों में भी अलग -अलग विचार धाराओं के होते हुए भी एक साथ मजबूती से खड़े होना । क्योंकि हमारा प्यार शर्तों पर नहीं , दिल से था । कोई बनावट नहीं ।
फिर , ‘ तुम जाति से बड़े रईस खानदान की बेटी ।
मेैं एक गरीब किसान का बेटा !’
रमेश ने लीना से गाँव में आम के तले बैठते हुए कहा। ‘
लीना – हाँ, हाँ जी मुझे सब याद है । ‘रमेश! तुम मुझे स्कूल के अन्य विद्यार्धियों से अलग ताड़ते थे और मुझे जब मेरी सहेली ने बताया तो मैं भी तुम में रुचि लेने लगी। एक अलग – सा मीठा-प्यारा गुद्गुदाने वाला एहसास!’
तुम्हें ‘,वो दिन याद है जब हम अहसासों के बंधन में पहली बार बँधे थे!’ पहली बार तुमने मुझे एक प्रेम पत्र दिया था । जो गुलाब के फूल के साथ गोलू के हाथ से भिजवाया था । छिपते- छिपाते !
तब मेरी उम्र 16 बरस की थी और तुम्हारी 22 बरस ! उस चिठ्ठी ने मुझे पहली बार खुद से प्यार करना सिखाया । आइने के सामने बार -बार जाती ,अलग -अलग तरह से बाल सँवारना, देखना कि मैं कैसी दिखती हूँ !’ एक बहुत ही प्यारा- सा अहसास जो सिर्फ एक रूह महसूस कर सकती है शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता।एक हल्का – सा स्पंदन, अजीब – सी हलचल ! आइने में तुम्हारा अक्स ढूँढती, फिर अपने को तलाशती शर्माती ।हम हम गाँव के स्कूल में साथ -साथ पढ़े । चूँकि तुम पढ़ने में बहुत होशियार थे। मुझे तुम्हें देखकर बहुत अच्छा लगता था । क्योंकि तुम लम्बे कद के सुंदर दिखने वाले लड़को में से एक थे ,शांत भी!
वो प्यार की चिट्ठी आज भी मेरे पास मौजूद है। ‘ रमेश ‘आज हमारे प्रेम विवाह को 25 वर्ष होगये ! मेरी जान! ‘आज भी उम्र के बढने के साथ-साथ तुम और भी खूबसूरत होगयी हो। हमारा प्यार भी वैसा ही है जैसे पहले था। क्योंकि हमारी कोई भी बंदिश नहीं । हम दोनों आज़ाद ख्याल के पूरे भरोसे के साथ ऊँच- नीच ,जाति -पाँति से अलग अपने प्यार की नींव हमने रखी हैं।’ उस समय विरोध भी अपनों के हुए किंतु आज उन्होंने ही गाँव के शिलान्यास के लिए हम दोनों को बुलाया। जिलाधिकारी होने के नाते सम्मानित किया । जो आम का पौधा हमनें 25 बरस पहले अपने प्रेम की निशानी के रूप में लगाया आज फलदार वृक्ष बन गया ।

 

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