खास कलम :: शांडिल्य रामानुजम

थोड़ा सा नाराज हूं   तुम मिले फिर आज मुझसे, खुश बहुत मै आज हूं। छोड़कर पर क्यूं गये थे, थोड़ा सा नाराज हूं।।   दीवारों के बीच थे बैठे, मन मे घुटन सी होती थी। बीती बातें याद आती थी, दिल मे चुभन सी होती थी ।।   याद किया तुझे हर पल जैसे, तू सरगम मै साज हूं। छोड़कर पर क्यूं गये थे, थोड़ा सा नाराज हूं।।   परदों के बाहर की दुनिया, पूरी तरह मै भूल चुका । ठंढी हवा के झोंकों मे तब, तेरी छुवन सी…

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पुस्तक समीक्षा :: ‘देखा है उन्हें’ की

समय की नब्ज़ को टटोलती कविताओं का नायाब गुलदस्ता ‘देखा है उन्हें’  डॉ भावना ‘देखा है उन्हें’ रविंद्र उपाध्याय जी का सद्य  प्रकाशित कविता- संग्रह है,जो अभिधा  प्रकाशन,  मुजफ्फरपुर से छप कर आया है। इस संग्रह में कुल 38 कविताएं हैं जो विभिन्न पृष्ठभूमि पर लिखी गई हैं ।रविंद्र उपाध्याय जी को साहित्य जगत छंद की वज़ह से जानता है ।उनकी छवि एक लोकप्रिय गीतकार की रही है। निराला कहते थे कि मुक्त छंद लिखने से पहले छंद का ज्ञान होना आवश्यक है। शब्दों की मितव्ययिता  की ताकत आपको संग्रह…

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लघुकथा :: गौतम कोइरी

शिक्षा का असर जंगल में प्रजातंत्र की बात हो रही थी। सारे पशुओ के प्रतिनिधियों की बनी कमेटी ने तय किया कि इसके लिए शिक्षा का प्रचार-प्रसार आवश्यक है। जन- जन तक इसका प्रचार होना चाहिए। शिक्षा का प्रचार-प्रसार शुरू हुआ। ऊँचे विचार वाले साहित्य रचे गए। बहुत से अनुदित हुए। तकनीकी ज्ञान का विकास हुआ। ऊँची डिग्रियों की व्यवस्था हुई। प्रचार-प्रसार का खूब नाटक चलता रहा। सियार पंडित जी पहले धोती-कुर्ता ही पहनते थे। लेकिन जब से गोल्ड मेडल मिला, थोड़े चर्चित हुए तब से धोती छूट गयी। सर्ट-पैंट…

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आलेख : सलिल सरोज

प्रेम करने से पहले प्रेम को पढ़िए भी – सलिल सरोज “कौन सा गुनाह ? कैसा गुनाह ? किसी से जिंदगी भर स्नेह रखने, प्रेम करने का गुनाह… स्नेह और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचने लगे तो उसका त्याग करने का गुनाह… है ना अजीब बात! पर यही तो किया चंदर ने अपनी सुधा के साथ! इस भुलावे में कि दुनिया प्यार के ऐसी पवित्रता के गीत गाएगी… प्यार भी कैसा… घर भर में अल्हड़ पुरवाई की तरह तोड़-फोड़ मचाने वाली सुधा, चंदर की आँख के एक इशारे से…

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समीक्षा :: आलोचना का विपक्ष

साहित्य के पक्ष की बात करता है “आलोचना का विपक्ष” नीरज नीर आलोचना मनुष्य की स्वाभाविक वृति है पर यह आलोचना जब किसी सम्यक विचारवान व्यक्ति के द्वारा की जाये जो आलोच्य  विषय वस्तु का ज्ञाता हो तो ऐसी आलोचना रचनाकर एवं पाठक दोनों  के लिए लाइट हाउस का काम करती है। आलोचना का अर्थ रचे गए साहित्य की अंतर्वृतियों एवं प्रवृतियों  का विवेचन करते हुये उसके गुण दोषों का मूल्यांकन करना एवं उसे पाठकों के समक्ष उद्भाषित करना है। आलोचना रचनात्मक साहित्य का प्रमुख अंग है। अच्छी आलोचना किसी…

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विशिष्ट कवयित्री : डॉ प्रतिभा सिंह  

अहल्या सुनो राम ! पूरी दुनियाँ जानती थी कि दोषी इंद्र था पर मुझे ही क्यों श्राप का भागी बनाया गौतम को महर्षि बनने का लालच था या सामाजिक भय जो इस तरह अपमानित कर चले गए इस निर्जन से वन में छोड़कर। वे तो मेरे अपने थे हम लम्बे युग के सहवासी थे फिर क्यों न समझ सके वे मुझको जब रचा जा रहा था षड्यंत्र मेरी अस्मिता को लूटने का क्यों न जान सके वे अपने तप के बल पर चन्द्रमा की भी कुटिलता को उसने भी तो…

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श्रद्धांजलि :: कैलाश झा किंकर

कैलाश झा किंकर गीत, कविता व ग़ज़ल के प्रमुख हस्ताक्षर रहे हैँ. साहित्य की विभिन्न विधाओ में ये निरंतर सृजन कर रहे हैं. पिछले दिनों कोरोना संक्रमण के कारण इनका निधन हो गया. आंच परिवार श्रद्धांजलि स्वरूप इनकी ग़ज़लें प्रकाशित कर रहा है – क़ै़लाश झा किंकर की ग़ज़लें – 1 चन्द सिक्के थमा के लूटेगा बात मीठी सुना के लूटेगा   संत-सा लग रहा है ऊपर से पास अपने बिठा के लूटेगा   कोई पत्थर नहीं पिघलता है उसको ईश्वर बता के लूटेगा   तीरगी को मिटा नहीं सकता…

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विशिष्ट कहानीकार :: सोनाली मिश्र

पहचान – सोनाली मिश्रा इस छोटे शहर के इकलौते बड़े होटल में आकाश अपने कमरे में वापस आ गया। हालांकि बारिश का मौसम नहीं था पर बेमौसम बारिश ने उसे भिगो दिया। अपने कमरे में आकर वह गीला ही कुर्सी पर बैठ गया है। लकड़ी की कुर्सी पर बैठा बैठा सामने बालकनी से बारिश को देख रहा था, सब कुछ भीग गया था, और स्वाहा हो रहे थे उसके सपने, उसका कल उसका आज! उसने अपनी पैंट में रखा हुआ कागज़ का टुकड़ा देखा, वह भी लुगदी बन गया था।…

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श्रद्धांजलि :: साहित्यकार डॉ शिवदास पांडेय

डॉ शिवदास पांडेय मुजफ्फरपुर के प्रमुख साहित्यकार रहे हैं. इनका चले जाना बिहार ही नहीं, देश की साहित्य-सर्जना के लिए बड़ी क्षति है. कुशल प्रशासक का दायित्व निभाते हुए इन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओ में सृजन कर देश को बहुत कुछ दिया है. प्रेम गीतों से पहचान बनाने वाले डॉ शिवदास पांडेय ने करीब डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकों की रचना की. इनमें प्रेमगीतों के अलावा व्यंग्य-संग्रह, लेखों का संग्रह व ऐतिहासिक जमीन पर आधारित उपन्यासों की लंबी शृंखला है. साहित्य सर्जना के लिए इन्हें 2016 में भारत सरकार के…

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