आलेख –

निबंध :: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में टैगोर

“आधुनिक परिप्रेक्ष्य में टैगोर” सत्यम शिवम सुंदरम गुरुवर रवीन्द्र नाथ टैगोर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के शाश्र्वत प्रतिनिधि हैं और रहेंगे।…

आलेख : मनोज जैन

मिल्टन से टकराता रहता रोज ईसुरी फाग के बहाने जंगबहादुर बंधु के दो गीतों पर मनोज जैन का समीक्षात्मक आलेख…

‘समाजवाद या बर्बरतावाद : मार्क्सवाद का द्वंद्वात्मक अंतर्विरोध’ : डॉ संजीव जैन

‘समाजवाद या बर्बरतावाद : मार्क्सवाद का द्वंद्वात्मक अंतर्विरोध’ रोजा लक्जमबर्ग ने मार्क्स के अध्ययन और पूंजीवादी व्यवस्था या उत्पादन पद्धति…