श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / एक भाई का चले जाना :: गरिमा सक्सेना

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / एक भाई का चले जाना :: गरिमा सक्सेना अमन चाँदपुरी २०-२१ साल का एक लड़का, कोई नहीं सोचता होगा कि लेखन में इस उम्र में कोई इतना परिपक्व व साहित्य के प्रति गम्भीर हो सकता है। अमन से मेरा पहला परिचय दोहा दंगल समूह में दोहा रत्न प्रतियोगिता के दौरान हुआ। वर्ष था २०१७ अमन ने जिस बारीकियों के साथ मेरे दोहों पर टिप्पणियां की वह अद्भुत था। जितना मैं उससे प्रभावित थी शायद उतना ही वह भी। इसके बाद उसका और मेरा साहित्यिक संबंध…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / दोहे :: हरिनारायण सिंह हरि

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / दोहे :: हरिनारायण सिंह हरि अमन शांति की खोज में, गया स्वर्ग के द्वार । यहाँ निरंतर रो रही, कविता जार-बेजार । ऐसे निष्ठुर क्यों बने, अमन!गये क्यों भाग । यहाँ अभागा रो रहा, सुबुक-सुबुक अनुराग । सबके प्रिय तुम थे बने, सबके जिगरी यार । अमन! तुम्हारे बिन यहाँ,फीके सब त्योहार । यद्यपि परिचय था नहीं, भले बहुत थे दूर । तुमको रचता देख-सुन, मैं भी था मगरूर । दोहा मंथन में अमन हम हैं तेरे साथ । इतनी जल्दी चल दिये, अरे, छुड़ाकर हाथ…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ यादें :: सतरूपा

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ यादें :: सतरूपा अभी 23 सितम्बर को युवा कवि अमन चांदपुरी पुस्तकमेला परिसर के मंच पर #गीतिका सौरभ सम्मान से सम्मानित हुए थे। असमय लगातार बारिश से सांस्कृतिक पंडाल परिसर थोड़ा बहुत अस्तव्यस्त था बावजूद समर्पित युवा से लेकर वरिष्ठ साहित्यकार सभी की मौजूदगी खूब रही। उसी दिन ही दूसरे पंडाल में युवाओं का पोएट्स हाऊस कार्यक्रम चल रहा था, मै वहां पहुंच चुकी थी। मंच की व्यवस्था , गीली कुर्सियों आदि को ठीक ठाक करके कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के तौर पर…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / यादें जो शेष रह गईं :: स्मिता श्री

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / यादें जो शेष रह गईं :: स्मिता श्री हम भावनाओं के अधीन बहुत कुछ करना चाहते हैं। अपनी तरफ से, सही है। पर क्या पता हमारी श्रद्धांजलि पहुंचती भी है? पता नहीं कोई ईश्वर चले जाने के बाद पास रखता भी है? कोई आत्मा शरीर के बाद भी शांति की तलाश पूरी करती है क्या? कह नहीं सकती, पर यह मुझे अच्छी तरह से पता है कि गये हुए की भरपाई कभी संभव नहीं है। न ही हमेशा के लिए चले जाने से पास दूर…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ ग़ज़ल :: अवधेश प्रसाद सिंह

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ ग़ज़ल :: अवधेश प्रसाद सिंह कौन कहता आदमी को काल कोई खा रहा ले गया जो कल अमन को क्या किसी को भा रहा कर रहा बदनाम मच्छर डेंगू को ही सब यहां क्या किसी उपचार का भी शोध कोई ला रहा हर किसी का दिल दहलता है अमन की मौत से दोष क्या था उस बिचारे का नहीं बतला रहा हर किसी को बाल बच्चे की फिकर तो है यहां है सभी संतान हम सब क्या समझ वह पा रहा गर नहीं तो कौन पूजेगा…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / शब्दों के फूल : कैलाश झा किंकर

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / शब्दों के फूल : कैलाश झा किंकर उम्र छोटी थी मगर साहित्य में रमता था मन। भेंट लखनऊ में हुई थी आपसे गत वर्ष ही इतनी जल्दी इस जहां से कैसे कर सकते गमन । उम्र थी बाईस की पर प्रौढ़ दोहाकार थे शब्द की ताकत बहुत थी आपमें था सच कथन। आपकी ग़ज़लों की जो तासीर थी अनमोल थी कौशिकी परिवार कैसे दुख करेगा यह सहन। आपका जाना हमारे बीच से घटना बुरी मन टिका है आप पर कमजोर अब लगता है तन। एक मच्छर…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी /गीतों से नमन :: दीपक

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी /गीतों से नमन :: दीपक मन को अपने चमन कर लें। अमन को हम नमन कर लें। अभी तो चमकना था ये ललाट अम्बर तक नयन ये जोहते रहते तुम्हारी बाट अम्बर तक खामोश अँधियारा हुआ सन्नाट अम्बर तक जाना है तुम्हारे पास इसको काट अम्बर तक हृदय अब धीर हम धर लें गमन को हम सहन कर लें मन को अपने चमन कर लें। अमन को हम नमन कर लें।।१।। तुम्हारी जिन्दगी एक गीत तुम्हारी याद एक ग़ज़ल रहे कुछ प्रश्न अन-सुलझे उन्हीं का ढ़ूढ़ते…

Read More

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी :: अमन चांदपुरी की ग़ज़लें : सौजन्य :के.पी.अनमोल

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी :: अमन चांदपुरी की ग़ज़लें : सौजन्य :के.पी.अनमोल अमन चांदपुरी की ग़ज़लें – लोग उत्पात करते रहते हैं घात-प्रतिघात करते रहते हैं काम जो शत्रु भी नहीं करता आजकल भ्रात करते रहते हैं तीन और तीन को ये व्यापारी जाने क्यों सात करते रहते हैं हम ही चिढ़ते हैं युद्ध से लेकिन हम ही शुरुआत करते रहते हैं वो समझते हैं दिन को दिन ही कहाँ दिन को जो रात करते रहते हैं हर घड़ी कौन साथ रहता है जिससे हम बात करते रहते हैं 2…

Read More

श्रद्धांजलि अमन चांदपुरी :: ग़ज़ल और कुंडलिया – अवधेश कुमार आशुतोष

श्रद्धांजलि अमन चांदपुरी :: ग़ज़ल और कुंडलिया – अवधेश कुमार आशुतोष ाजनता हूँ लौटकर आना तुम्हें फिर से अमन है आंसुओं की धार से भींगा भला क्यों हर नयन है तुम छुड़ाकर हाथ सबसे,दूर नजरों से हुए हो यह नहीं तुम जानते,सबको लगी तेरी लगन है आ गयी कैसी खिजाँ ये,अब बहारें जा चुकी हैं फूल में काँटे उगे क्यों,लुट गया सारा चमन है गीत गजलों में हमेशा मुस्कुराओगे सदा तुम दे रहे तुमको धरा हम और लो सारा गगन है चाहनेवाले तुम्हारे ढेर दुनिया में अमन है पेड़ पौधे बाग,…

Read More

श्रद्धांजलि : अमन चांदपुरी /दोहा : बाबा बैद्यनाथ झा

श्रद्धांजलि : अमन चांदपुरी /दोहा : बाबा बैद्यनाथ झा नियति नटी क्यों हो गयी,बोलो इतना क्रूर। किया अमन को दुष्ट ने,असमय हमसे दूर।। रोता है साहित्य का, पूरा दिव्याकाश। श्रद्धांजलि हम दे रहे, आज उसे भरपूर।।  

Read More