है सूरज छिपा कहाँ पर – मुकेश कुमार सिन्हा

गांव और प्रकृति की संवेदनशील कवयित्री गरिमा सक्सेना – मुकेश कुमार सिन्हा आलोचकों की हमेशा शिकायत रहती है कि नई पीढ़ी साहित्य का बँटाधार कर रही है। नई पीढ़ी जो रचती है, उसमें न भाव है, न शिल्प, न सौंदर्य है और न शुद्धता। वैसे आलोचकों के लिए नई पीढ़ी की हस्ताक्षर गरिमा सक्सेना को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है। गरिमा जितनी मुस्तैदी के साथ चित्र बनाकर अपनी सामाजिक भूमिका निभा रही है, ठीक उसी तरह से साहित्य का सृजन भी कर रहीं हैं। बीटेक की…

Read More

समीक्षा : मधुकर वनमाली

नई समीक्षा : ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) – मधुकर वनमाली सत्यम‌ शिवम‌ सुंदरम ईदगाह, हिन्दुस्तान की कहानी है।वह हिन्दुस्तान जिसकी तहजीब आज खो गई है।वही तहजीब जो बड़ों को इज्जत और छोटों को प्यार देने को ,इबादत मानता था।ग़रीबी जहां खुशियों के आड़े न आ सकती थी। मुंशी प्रेमचंद के उस हिन्दुस्तान में, दो भारत नही बसते थे। आज हिन्दुस्तान में मजहब के आधार पर त्योहार बँट गए हैं। लोगों की सोच में परिवर्तन आ चुका है।पर अगर हम ईदगाह कहानी को किसी दशहरे के मेले के साथ बदल कर देखें,तो…

Read More

पुस्तक समीक्षा : वो पता ढूंढें हमारा (ग़ज़ल संग्रह) – जीवन सिंह

मुसीबत में ईमान की रक्षा करने वाली ग़ज़लें – जीवन सिंह जब से दुष्यंत कुमार ने ग़ज़ल को उसकी अपनी पारंपरिक चौहद्दियों से बाहर निकालकर उसे जिन्दगी के बड़े और खुले मैदान में उतारा तब से एक जरूरी बात यह हुई कि उसे लोकप्रियता के साथ व्यापकता, विविधता और विस्तार करने का अवसर भी मिल गया | वह एक तरह की घुटन और अँधेरे से बाहर निकलकर कविता की तरह ज़िंदगी के बाहरी और भीतरी यथार्थ को जिन्दादिली के साथ टोहने वाली विधा बन गयी |उसका कुछ ऐसा रूपांतरण हुआ कि…

Read More

पुस्तक समीक्षा :: शहंशाह आलम

आग की छाती पर पैर रखकर –  शहंशाह आलम रंजीता सिंह ‘फ़लक’ की कविताओं का संग्रह ‘प्रेम में पड़े रहना’ ऐसे वक़्त में छपकर आया है, जब दुनिया भर में स्त्रियों के लिए एक अलग तरह का माहौल बनाया जा रहा है। यह माहौल स्त्रियों के पक्ष में अब  भी पूरी  तरह  से  नहीं कहा जा सकता। ज़ाहिर है, जब दुनिया भर की स्त्रियां अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं ,तो चूँकि रंजीता सिंह ‘फ़लक’ ख़ुद एक स्त्री हैं, सो ऐसे किसी  भी  सामाजिक  आसमानता  के विरुद्ध इनकी मुट्ठियाँ…

Read More

पुस्तक समीक्षा :: डाॅ सीमा शर्मा

भावों की सशक्त अभिव्यक्ति, भाषा का सरल प्रवाह : डॉ. सीमा शर्मा ‘खिड़कियों से झाँकती आँखें’ सुधा ओम ढींगरा का सातवाँ कहानी संग्रह है। इन सभी कहानी संग्रहों को पढ़ने के बाद स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि आपकी कहानियाँ भारत और अमेरिका के बीच एक ऐसे पुल का निर्माण करती हैं, जिस पर चलकर आप इन दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने बहुत बारीकी से समझ सकते हैं। आप चीज़ों को व्यापक परिदृश्य में देखते हैं और इस प्रक्रिया में आपके कई पूर्वाग्रह ध्वस्त हो जाते…

Read More

पुस्तक समीक्षा :: ईश्वर का अनुवाद करते हुए

विलक्षण,  बिंब, प्रतीक और भाषा का संगम ‘ईश्वर का अनुवाद करते हुए’  ‘ईश्वर का अनुवाद करते हुए’ वरिष्ठ कवि डॉक्टर स्वदेश कुमार  भटनागर का सद्य प्रकाशित गद्य कविता- संग्रह है, जो प्रकाश बुक डिपो ,बरेली से छप कर आया है ।संग्रह में कुल 8 सर्ग हैं जिनमें अलग-अलग भाव और पृष्ठभूमि पर कविताएं लिखी गई हैं ।संग्रह के आवरण  पर ही छंद मुक्त कविता की जगह गद्य कविता की स्वीकारोक्ति  कवि की स्पष्टवादिता की निशानी है।  कविता मनुष्यता की मातृभाषा होती है। कवि कविता को रचते हुए अपने जीवनानुभवों को…

Read More

सामाजिक दायित्व के बोध की ग़ज़लें :: चुप्पियों के बीच

  सामाजिक दायित्व के बोध की ग़ज़लें :: चुप्पियों के बीच मुकेश कुमार सिन्हा वो विज्ञान की विद्यार्थी रहीं हैं। रसायन शास्त्र पसंदीदा विषय है। फिर भी साहित्य में गहरी पैठ है। वो गज़ल कहती हैं, वो कविता रचती हैं। आलेख और समीक्षा में भी उनकी गहरी अभिरुचि है। जी हाँ, डॉ भावना एक ऐसी ही कलमकार हैं, जो रसायन शास्त्र की प्राध्यापिका हैं, फिर भी हिन्दी के प्रति समर्पण है। डॉ. भावना की ‘रसायनी’ का हिन्दी साहित्य से मेल-जोल वाकई काबिल-ए-तारीफ है। अक्स कोई तुम सा (2012) और शब्दां…

Read More

पुस्तक समीक्षा : उछालो यूँ नहीं पत्थर

मुंगेर के युवा ग़ज़लकार विकास की गजल संग्रह “उछालो यूँ नहीं पत्थर” से गुजरते हुए – कुमार कृष्णन आधुनिक हिन्दी गजल अपने मौलिक चिंतन तथा विशिष्ट कथ्य-प्रतिभा के बल पर चर्चित और प्रशंसित हो रही है। हालांकि कुछ आलोचक हिन्दी गजल को सौंदर्य के प्रेम-प्रसंग के अंतर्गत  ही देखना पसंद करते हैं और अपनी उसी मानसिकता के साथ इसे परिभाषित भी करते हैं। जबकि सच है कि हिन्दी गजल अपने जन्मकाल से ही जीवन यथार्थ से जुड़ी रही है। ऐसी भी बात नहीं है कि इसके भीतर प्रेम और सौंदर्य…

Read More

पुस्तक समीक्षा :: के.पी.अनमोल

समालोचना के निकष पर ग्यारह ग़ज़लकार: विमर्श के बहाने – के. पी. अनमोल पिछले अनेक सालों से ज़हीर क़ुरैशी हिन्दी ग़ज़ल के प्रवक्ता ग़ज़लकार रहे हैं, इस बात पर कोई सन्देह नहीं। उन्होंने हिन्दी ग़ज़ल की भाषिक संरचना में बड़ा योगदान दिया है। इधर कुछ समय से उनका गद्य लेखन भी लगातार प्रकाशित हो रहा है। उनका संस्मरण संग्रह ‘कुछ भूला कुछ याद रहा’ वर्ष 2016 में प्रकाशित हुआ है। साथ ही कुछ पत्रिकाओं के लिए लिखे गये उनके लेख, जो हिन्दी-उर्दू के ऐसे शायरों पर केन्द्रित रहे हैं, जिनके लेखन…

Read More

पुस्तक समीक्षा :: नीरज नीर

अगस्त्य के महानायक श्रीराम : एक मनुष्य के रूप में राम के अंतर्द्वंद्वों की पड़ताल – नीरज नीर राम कथा का कथानक ऐसा है कि इसे जितनी बार लिखा जाये, हर बार कुछ नए रंग, कुछ नए शेड उभर कर सामने आते हैं, जो पहले देखे, गुने, समझे गए कथ्यों से भिन्न होते हैं। हजारों वर्षों से राम और उनकी कथा भारतीय जनमानस का कंठहार बनी हुई है। हम राम को जिस रूप में देखते और पढ़ते आए हैं, वह राम का एक पूजनीय रूप है, जिसमे वे मर्यादा पुरुषोत्तम…

Read More