हेमलता – एक मखमली आवाज़ :: सलिल सरोज

हेमलता – एक मखमली आवाज़ “अँखियों के झरोखों से, मैने देखा जो साँवरे तुम दूर नज़र आए, बड़ी दूर नज़र आए बंद करके झरोखों को, ज़रा बैठी जो सोचने मन में तुम्हीं मुस्काए, बस तुम्हीं मुस्काए” 16 मार्च 1978 को प्रदर्शित हुई फिल्म “अँखियों के झरोखों से” के इस टाइटल ट्रैक को आप चाहे जितनी बार भी सुन लीजिए ,आप फिर से इसे दोबारा सुनने से अपने आप को रोक नहीं पाएँगे।  रविन्द्र जैन का बेहतरीन गीत और संगीत आपको किसी और ही दुनिया में लेके जाता है ; लेकिन…

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फ़िल्म समीक्षा

बंटवारे को लेकर एक अलग नजरिया देती है पार्टीशन 1947 अगर आप बंटवारे को लेकर जानना चाहते हैं, समझना चाहते हैं तो ‘पार्टीशन 1947’ आपको एक बार ज़रूर देखनी चाहिए। मुख्य कलाकार: हुमा कुरैशी, ह्यूज बोनविल, ओम पुरी, गिलिन एंडर्सन, मनीष दयाल, माइकल गैम्बोन, डेंजिल स्मिथ आदि। निर्देशक: गुरिंदर चड्ढा निर्माता: पॉल माएदा बर्ज़ेज़, गुरिंदर चड्ढा, दीपक नायर। भारत और पाकिस्तान का विभाजन मानव इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है। जहां पुरखों से रहते आये वो ज़मीं, वो संस्कार, वो गलियां वो घर बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों…

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लिपस्टिक अंडर माई बुर्का

मुख्य कलाकार: कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक, आहना कुमरा आदि निर्देशक: अलंकृता श्रीवास्तव निर्माता: प्रकाश झा   औरतों की खुशी, ख्‍वाहिशें, कल्‍पनाएं, जुनून और महत्‍वाकांक्षाओं को बिना लाग लपेट के अलंकृता श्रीवास्तव ने इस फिल्‍म में पेश किया है। जैसा सआदत हसन मंटो व इस्‍मत चुगतई की कहानियों में होता है। फिल्‍म की कथाभूमि भोपाल में है, जो पुरानी और आधुनिक संस्‍कृतियों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा है। अलंकृता के कायनात की बुआजी उर्फ ऊषा, शिरीन असलम, लीला, रिहाना वहां के पुराने व तकरीबन खंडहर बनने की…

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