आत्मनिर्भरता : प्रशांत करण

आत्मनिर्भरता                    – प्रशांत करण     परसों ही लौकडाउन चार के समय हमारे आर्यावर्त के प्रधानमंत्री जी ने देश को सम्बोधित करते हुए आत्मनिर्भरता का मंत्र दिया है।सो आज चर्चा इसी आत्मनिर्भरता पर।     हमारे यहाँ आत्मनिर्भरता के कीड़े बचपन से ही हमारे शरीर में प्रवेश कर चुके हैं।बचपन से ही बच्चे अपनी पसंद-नापसन्द के फैसले लेने में स्वतंत्र और आत्मनिर्भर रहे हैं।स्कूल जाते समय घर से ही  किताब कॉपी के अलावे खेल के सुविधानुसार उपकरण/  सामग्री साथ ले जाते हैं।कई…

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ख़्वाहिश करना कोई गुनाह तो नहीं ! – रश्मि तरिका

ख़्वाहिश करना कोई गुनाह तो नहीं ! – रश्मि तरिका   इंसानों की इस दुनिया में, बस यही तो इक रोना है …. जज़्बात अपने हों तो ही जज़्बात हैं, दूजों के हों तो खिलौना हैं !! जी हाँ …खिलौना ! जज़्बातों की डुगडुगी बजाता खिलौना जो हमारा अपना ही जब बजाता है तो बस दिल छलनी छलनी हो जाता है। जब दिल छलनी हुआ है तो ज़ख्म भी हुए होंगे और ज़ख्म है तो छूरी भी चली होगी न । एक लंबे अरसे से ,काफ़ी ज़द्दोज़हद के बाद तक़रीबन…

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हास्य व्यंग्य

मूँछ, नाक और मनोबल – स्नेह मधुर हर इन्सान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढ़े लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की भी नाक होती है लेकिन जानवरों की नाक इनसानी नाक की तरह जब तब कटती नहीं रहती है। यह शोध का विषय हो सकता है कि इंसान को अपनी नाक कटने से अधिक पीड़ा होती है या जेब कटने से-  या फिर इंसान की जेब और नाक में किस तरह का संबंध है? इंसान की नाक उसकी प्रतिष्ठा का प्रतीक…

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कवि कालिदास का जन्म-स्थान –रवीन्द्रनाथ त्यागी

इतना तो लगभग निश्चित हो ही चुका है कि कवि कालिदास नाम के सज्जन कभी न कभी हुए ज़रूर थे। क्यों कि किसी और देश ने उनके बारे में अपना कोई दावा अभी तक दायर नहीं किया है, इस कारण यह स्वीकार करना भी न्यायसंगत ही होगा कि कालिदास मात्र हुए ही नहीं थे वरन भारत में ही हुए थे। अब सिर्फ़ दो मुद्दे बाकी रह जाते हैं : एक तो यह कि वे कब हुए थे और दूसरा यह कि उनका जन्मस्थान कहाँ था। पहला मुद्दा श्रीलाल शुक्ल ने…

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