विशिष्ट ग़ज़लकार :: डॉ. पंकज कर्ण

डॉ.पंकज कर्ण की दो ग़ज़लें 1 हमें तहज़ीब दुनिया की वो कुछ ऐसे सिखाता है निगाहें हम मगर वो देखिए उंगली उठाता है तिरंगे में...

विशिष्ट ग़ज़लकार :: मधुकर वनमाली

मधुकर वनमाली की तीन ग़ज़लें भारत जनम यह देश की खातिर,हमारी जान है भारत तिरंगा झुक नहीं सकता, हमारी शान है भारत बड़ी मुश्किल से...

विशिष्ट ग़ज़लकार :: रमेश चन्द्र गोयल ‘प्रसून’

1 आँखों की तस्वीर अलग है आँसू की तस्वीर अलग अपना-अपना हिस्सा सबका है सबकी तक़दीर अलग प्यार किया हो जिसने केवल स्वाद वही जाने...

विशिष्ट ग़ज़लकार :: विजय कुमार स्वर्णकार

1 अपने मित्रों के लेखे- जोखे से हमको अनुभव हुए अनोखे -से हमने बरता है इस ज़माने को तुमने देखा है बस झरोखे से ज़िन्दगी...

विशिष्ट ग़ज़लकार :: रवि खण्डेलवाल

1 कब  तलक   मुर्दा  बने   सोते  रहोगे ज़िंदगी  की   लाश  को   ढोते  रहोगे हाथ पर  धर  हाथ  यदि  बैठे  रहे तो वक़्त  को  यूँ  ही ...