विशिष्ट कवयित्री :: लता सिन्हा ज्योतिर्मय

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क़लम के सिपाही
              – लता सिन्हा ज्योतिर्मय

बड़ी थी ललक, करुँ देश की सेवा
निरंतर हो लग्न
एक सैन्य पुत्री हो के भी थामा है
शस्त्रों में कलम

भले प्राण छोड़े देह लेकिन
प्रण कभी होगा ना भंग
लेकर कलम सा शस्त्र
हो निष्पक्षता लेखन के संग

इन सत्ता की गलियारों में
मिली थी सिसकती भारती
आंखें मिली मुझसे कहा
तुझे लेखनी…धिक्कारती

मैंने शपथ ली है तिरंगे की
विपुल जन ज्ञान हो
योद्धा बनूं लेकर कलम
जनजागृति संधान हो

चल क्रांति की ज्योति जला दूं
धुंध के पट खोल दूं
कर राह ज्योतिर्मय कलम से
हिंद की जय बोल दूं

जय हिंद… जय भारत

लता सिन्हा ज्योतिर्मय
मुजफ्फरपुर बिहार

 

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