चौदहवां संस्करण

आलेख : संजीव जैन

वस्तुकरण का उन्माद आधुनिक पूँजीवादी व्यवस्था ने पूरी दुनिया को ‘वस्तुकरण के उन्माद’ की धुंध और कुहासे के अनंत चक्रव्यूह…