संपादक की कलम से ( तीसरा संस्करण )

सावन हे सखी सगरो सुहावन कहते हैं, समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव -शंकर ने जब हलाहल का पान किया तो उनका पूरा शरीर विष  के ताप से नीला हो गया. इस ताप के शमन के लिए इंद्र भगवान ने खूब वर्षा की. संभवत: इसी वजह से भगवान शिव को जल का अभिषेक सर्वाधिक प्रिय है. कवि अपनी कल्पना में अक्सर धरती को प्रेमिका और आसमान को प्रेमी के रूप में देखता है. धरती जब जेठ की धूप में झुलसने लगती है. तब आसमान बादल को धरती पर भेजकर  शीतल…

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