पुस्तक समीक्षा –

कोरोना काल में बेबसी की कविताएं ‘दुनिया भेलई उदास’ :: सुधांशु चक्रवर्ती

कोरोना काल में बेबसी की कविताएं ‘दुनिया भेलई उदास’ सुधांशु चक्रवर्ती दुनिया की कोई भी भाषा पिंजरे में क़ैद नहीं…

वक़्त के नब्ज को पकडती हुई कविताओं का संग्रह ‘बोलो न दरवेश’ : ज्योति रीता

वक़्त के नब्ज को पकडती हुई कविताओं का संग्रह ‘बोलो न दरवेश’  स्मिता सिन्हा हमारे समय की गंभीर कवियत्री हैं।…