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विशिष्ट गीतकार : मंजू लता श्रीवास्तव
धन्य ये प्राण हो गए हाट हुए हैं बंद घाट सुनसान हो गए जीवन के अवरुद्ध सभी अभियान हो गए था स्वतंत्र अब तक यह जीवन अपनी शर्तों पर…
विशिष्ट गीतकार :: गरिमा सक्सेना
(1) प्रिये तुम्हारी आँखों ने कल दिल का हर पन्ना खोला था दिल से दिल के संदेशे सब होठों से तुमने लौटाये प्रेम सिंधु में उठी लहर जो कब तक…
विशिष्ट गीतकार : संजय पंकज
रात चाँदनी चुपके आई खिड़की से सिरहाने में! सुबह सुबह तक रही सुबकती लीन रही दुलराने में! पता नहीं क्यों लापता रही कितने दिन बेगानों-सी इधर रही पर मेरी हालत…
