लघुकथा
नीलिमा शर्मा की लघुकथाएं अपना सुख “पापा आपके घर क्या बर्तन नही थे जो माँ शादी में बर्तन फर्नीचर लेकर आई थी ‘ बेटे ने हाथ से अखबार लेते हुए गुप्ता…
नीलिमा शर्मा की लघुकथाएं अपना सुख “पापा आपके घर क्या बर्तन नही थे जो माँ शादी में बर्तन फर्नीचर लेकर आई थी ‘ बेटे ने हाथ से अखबार लेते हुए गुप्ता…
आलता लाल एक जोड़ी घिसे पाँव निकल पड़े हैं आदिम दिशा को कर आई विदा जिन्हें बस कल ही वो पलटे नहीं न ठिठके न ही बदली दिशा अपनी पुकारता…
अंधेरे का इन्द्रधनुष : मुक्तिबोध की कविता – संजीव जैन मुक्तिबोध को पढ़ना जैसे अंधेरे में लालटेन के सहारे अकेले बियावान जंगल से गुजरने की प्रक्रिया में पहाड़ों और बावडियों…
प्रजापति की ग़ज़लें अत्यंत सहजता से वर्तमान के यथार्थ तक ले जाती हैं – अनिरुद्ध सिन्हा डॉ कृष्ण कुमार प्रजापति की ग़ज़लें साधारण बोलचाल की आवाज़ के उतार-चढ़ाव में हैं…
पुस्तक समीक्षा हर इक ख़ूबी-ओ-ख़ामी पर नज़र जाए तो अच्छा हो: दहलीज़ का दिया – के. पी. अनमोल ‘दहलीज़ का दिया’ भाई वाहिद काशीवासी का पहला ग़ज़ल संग्रह है। बनारस…
खास कलम : गुंजन गुप्ता हाइकु धनतेरस धन बरसाये व लाये खुशियाँ ॥ धन्वंतरि दें आशीष मिटे रोग रहें आरोग्य ॥ दीपावली में लक्ष्मी गणेश संग विराजें घर ॥ धन…
विशिष्ट गीतकार : डॉ रवींद्र उपाध्याय धूप लिखेंगे, छाह लिखेंगे धूप लिखेंगे, छाह लिखेंगे मंजिल वाली राह लिखेंगे खुशियों के कोलाहल में जो दबी-दबी है आह, लिखेंगे बादल काले – उजला…
विशिष्ट कवि : शहंशाह आलम घाटी के नीचे घाटी घाटी के नीचे की घाटी के बारे में सबको पता नहीं है सदियों से दुर्बल के भीतर रहता है एक और…
विशिष्ट गजलकार : शिवकुमार बिलगरामी (1 ) एक महफ़िल सजाये बैठा हूँ तुझ से दिल को लगाए बैठा हूँ तुझ से मिलने की बेक़रारी है बेक़रारी दबाये बैठा हूँ तेरे…
किवाड़ों का पसीजापन उसका रुकना जैसे एक गजब हो गया था। न जाने वह क्यों रुक गयी थी? क्या भुला दिए गए लोगों को ऐसे रुकने का अधिकार होता है?…