‘खैराबेमू’ : रंगकर्मी ‘पंकज’ का समानान्तर नाट्य-आन्दोललन :: डॉ.अमर पंकज

 ‘खैराबेमू’ : रंगकर्मी ‘पंकज’ का समानान्तर नाट्य-आन्दोललन – डॉ अमर पंकज सारांश: आचार्य प्रोफेसर ज्योतीन्द्र प्रसाद झा ‘पंकज’ का जन्म 30 जून 1919 को तत्कालीन बिहार के संताल परगना जिला…

मन और मंज़र :: शुभम कुमार

मन और मंज़र (संस्मरणात्मक ललित निबंध) – शुभम कुमार प्रतिदिन की भाँति आज भी सुबह की मॉर्निंग वॉक के बाद जब मैं अपने बगीचे में पहुँचा, तो खिले फूलों को…

समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में जन-मुक्ति की चेतना :: डॉ.अविनाश भारती

समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में जन-मुक्ति की चेतना – डॉ.अविनाश भारती हिन्दी ग़ज़ल का विकास एक सांस्कृतिक संक्रमण की कथा है। अरबी-फारसी परंपरा में जन्मी यह विधा जब उर्दू में विकसित…

बिहारी बोलियों की लोक – कथाओं का अध्ययन :: डाॅ शान्ति कुमारी

बिहारी बोलियों की लोक – कथाओं का अध्ययन – डाॅ शान्ति कुमारी डॉ. ग्रियर्सन ने भोजपुरी और मैथिली का अध्ययन बिहारी भाषा के अंतर्गत किया था । डॉ ० ग्रियर्सन…

साये में धूप’ के पचास साल और दुष्यंत कुमार की ग़ज़लधर्मिता : डॉ.अविनाश भारती

साये में धूप’ के पचास साल और दुष्यंत कुमार की ग़ज़लधर्मिता डॉ. अविनाश भारती दुष्यंत कुमार की कालजयी कृति ‘साये  में धूप’ के प्रकाशन के पचास वर्ष पूरे हो चुके…

‘साये में धूप’में अभिव्यक्त दुष्यंत कुमार की सामाजिक चेतना : वेदप्रकाश भारती

‘साये में धूप’में अभिव्यक्त दुष्यंत कुमार की सामाजिक चेतना वेदप्रकाश भारती दुष्यंत कुमार, जिनका नाम हिंदी गजल के प्रथम गजलकार के रूप में जाना जाता है। जिन्होंने गजल को रोमानियत…

दुष्यंत कुमार की समसामयिकता : राजेन्द्र राज

दुष्यंत कुमार की समसामयिकता  राजेन्द्र राज 1975 में ‘साए में धूप‘ ग़ज़ल-संग्रह से दुष्यंत कुमार लोकप्रियता की मुकाम पर पहुंचे और आम लोगों ने उनकी सामाजिक चेतना तथा आंदोलनात्मकता को…