पर्वतों और घाटियों का सम्मोहन वृतांत कौसानी कथा :: डाॅ.भावना

पर्वतों और घाटियों का सम्मोहन वृतांत कौसानी कथा डॉ.भावना यहाँ पर्वत बोलते हैं (कौसानी-कथा) राहुल शिवाय बहुचर्चित पुस्तक है यह एक ऐसी किताब जो आपको अपने सम्मोहन में बांध दे…

सच बयानी का नहीं ये चुप्पियों का दौर है :: विजय वेदांत

सच बयानी का नहीं ये चुप्पियों का दौर है   – विजय वेदांत ‘खामोशियों का दौर’ जितेंद्र कुमार ‘नूर’ का दूसरा ग़ज़ल संग्रह है, जिसमें समकालीन भारत के राजनीतिक, सामाजिक…

देख सको तो देख :: डॉ.अविनाश भारती

देख सको तो देखो डॉ अविनाश भारती समकालीन हिन्दी ग़ज़ल अपने समय की बेचैनियों, संघर्षों और आम आदमी की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने वाली एक सशक्त विधा के रूप में…

‘चिड़ियों की दावेदारी’ गजल की दुनिया की एक बहुमूल्य कृति :: जयप्रकाश मिश्र

‘चिड़ियों की दावेदारी” गजल की दुनिया की एक बहुमूल्य कृति जयप्रकाश मिश्र डॉ भावना साहित्य जगत में एक सुपरिचित एवं सम्मानित नाम है। इनकी सद्य प्रकाशित गजल संग्रह ” चिड़ियों…

‘तुझे हो यकीं कि न हो यकीं’ में समय, समाज और प्रतिरोध की चेतना :: विजय वेदांत     

‘तुझे हो यकीं कि न हो यकीं’ में समय, समाज और प्रतिरोध की चेतना विजय वेदांत समकालीन हिन्दी ग़ज़ल आज केवल प्रेम, विरह और निजी भावनाओं की अभिव्यक्ति तक सीमित…

पुस्तक समीक्षा :: डॉ.जियाउर रहमान जाफरी

मधुरता और मिठास के साथ मुद्दों पर लिखा गया गीत जहाँ नहीं उजियार योगेंद्र प्रताप मौर्य लिखित नवगीत का नया संग्रह है. इससे पहले नवगीत की एक तथा बाल कविताओं…

पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व :: देवेंद्रराज सुथार

पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व देवेन्द्रराज सुथार   सुरेश सौरभ द्वारा संपादित ‘पावन तट पर’ साझा लघुकथा संग्रह आस्था और अंधविश्वास के मध्य विद्यमान सूक्ष्म विभाजक रेखा…

स्त्री विमर्श को नयी दिशा देता है बज्जिका उपन्यास ‘लाडो’ : हरिनारायण सिंह ‘हरि’ 

स्त्री विमर्श को नयी दिशा देता है बज्जिका उपन्यास ‘लाडो’ – हरिनारायण सिंह ‘हरि’          हिन्दी की प्रमुख महिला गजलकारा डाॅ भावना की मातृभाषा बज्जिका है और…

मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज ‘मिट्टी कटी किनारों की’ : उदय शंकर सिंह ‘उदय’

मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज ‘मिट्टी कटी किनारों की’ –  उदय शंकर सिंह ‘उदय’ आज तड़के ही जग गया! वैसे सुबह  की नींद बड़ी  प्यारी होती है। यही वह वक्त …

‘अपने हिस्से का ख़्वाब’: अविनाश बंधु की ग़ज़ल यात्रा – डॉ.भावना

‘अपने हिस्से का ख़्वाब’: अविनाश बंधु की ग़ज़ल यात्रा – डॉ.भावना  ‘अपने हिस्से का ख़्वाब’ अविनाश बंधु का ताज़ा ग़ज़ल संग्रह है. इस संग्रह में कुल 101 ग़ज़लें हैं, जो…