‘चिड़ियों की दावेदारी’ गजल की दुनिया की एक बहुमूल्य कृति :: जयप्रकाश मिश्र
‘चिड़ियों की दावेदारी” गजल की दुनिया की एक बहुमूल्य कृति जयप्रकाश मिश्र डॉ भावना साहित्य जगत में एक सुपरिचित एवं सम्मानित नाम है। इनकी सद्य प्रकाशित गजल संग्रह ” चिड़ियों…
‘चिड़ियों की दावेदारी” गजल की दुनिया की एक बहुमूल्य कृति जयप्रकाश मिश्र डॉ भावना साहित्य जगत में एक सुपरिचित एवं सम्मानित नाम है। इनकी सद्य प्रकाशित गजल संग्रह ” चिड़ियों…
‘तुझे हो यकीं कि न हो यकीं’ में समय, समाज और प्रतिरोध की चेतना विजय वेदांत समकालीन हिन्दी ग़ज़ल आज केवल प्रेम, विरह और निजी भावनाओं की अभिव्यक्ति तक सीमित…
मधुरता और मिठास के साथ मुद्दों पर लिखा गया गीत जहाँ नहीं उजियार योगेंद्र प्रताप मौर्य लिखित नवगीत का नया संग्रह है. इससे पहले नवगीत की एक तथा बाल कविताओं…
पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व देवेन्द्रराज सुथार सुरेश सौरभ द्वारा संपादित ‘पावन तट पर’ साझा लघुकथा संग्रह आस्था और अंधविश्वास के मध्य विद्यमान सूक्ष्म विभाजक रेखा…
स्त्री विमर्श को नयी दिशा देता है बज्जिका उपन्यास ‘लाडो’ – हरिनारायण सिंह ‘हरि’ हिन्दी की प्रमुख महिला गजलकारा डाॅ भावना की मातृभाषा बज्जिका है और…
मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज ‘मिट्टी कटी किनारों की’ – उदय शंकर सिंह ‘उदय’ आज तड़के ही जग गया! वैसे सुबह की नींद बड़ी प्यारी होती है। यही वह वक्त …
‘अपने हिस्से का ख़्वाब’: अविनाश बंधु की ग़ज़ल यात्रा – डॉ.भावना ‘अपने हिस्से का ख़्वाब’ अविनाश बंधु का ताज़ा ग़ज़ल संग्रह है. इस संग्रह में कुल 101 ग़ज़लें हैं, जो…
सच को आईना दिखा रहा ‘आईने से पूछो’ सुदेश कुमार मेहर ग़ज़ल का सौंदर्य उसके शिल्प में निहित है। ग़ज़ल की विशेषता ही यह है कि उसका सौन्दर्य उसके शिल्प…
सोनरुपा विशाल की ग़ज़लों में अंदर की बेचैनी …
अब मैं बोलूँगी : एक खरी और ज़रूरी किताब शैली बक्षी खड़कोतकर स्मृति आदित्य, मीडिया और साहित्य का सुपरिचित नाम, जब कहती हैं ‘अब मैं बोलूँगी’ तो सुनने वालों को सजग, सतर्क होकर सुनना होगा।…