विशिष्ट ग़ज़लकार :: अनिरुद्ध सिन्हा

अनिरुद्ध सिन्हा की आठ ग़ज़लें एक यहीं देखो  तलाशो तुम दुबारा मिलेगा आईने में सच तुम्हारा   उजालों  ने कभी रस्ता निहारा अँधेरों ने  कभी हँसकर पुकारा   सफ़र मेरे…

पर्वतों और घाटियों का सम्मोहन वृतांत कौसानी कथा :: डाॅ.भावना

पर्वतों और घाटियों का सम्मोहन वृतांत कौसानी कथा डॉ.भावना यहाँ पर्वत बोलते हैं (कौसानी-कथा) राहुल शिवाय बहुचर्चित पुस्तक है यह एक ऐसी किताब जो आपको अपने सम्मोहन में बांध दे…

सच बयानी का नहीं ये चुप्पियों का दौर है :: विजय वेदांत

सच बयानी का नहीं ये चुप्पियों का दौर है   – विजय वेदांत ‘खामोशियों का दौर’ जितेंद्र कुमार ‘नूर’ का दूसरा ग़ज़ल संग्रह है, जिसमें समकालीन भारत के राजनीतिक, सामाजिक…

डाॅ. शांडिल्य रामानुजम की दो हास्य कविताएँ

डाॅ. शांडिल्य रामानुजम की दो हास्य कविताएँ   1. पत्नी गूंगी, पति बहरा एक दिन पत्नी ने कहा अब मैं चुप रहूंगी तुमको किसी भी तरह कभी तंग नहीं करूंगी…

देख सको तो देख :: डॉ.अविनाश भारती

देख सको तो देखो डॉ अविनाश भारती समकालीन हिन्दी ग़ज़ल अपने समय की बेचैनियों, संघर्षों और आम आदमी की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने वाली एक सशक्त विधा के रूप में…

विशिष्ट कवयित्री :: अनीता सिंह

अनीता सिंह की पांच कविताएं   बरसा हथिया चौरी-चांचर सूंड गिराकर हथिया बरसा जोर- जोर से।   जब चढ़ता अदरा नहीं बरसे तब माटी फसलों को तरसे विदा काल जब…