विशिष्ट ग़ज़लकार :: डॉ रोहिताश्व अस्थाना
1 दर्द का इतिहास है हिन्दी ग़ज़ल एक शाश्वत प्यास है हिन्दी ग़ज़ल प्रेम, मदिरा, रूप की बातें भरी अब नहीं बकवास है हिन्दी ग़ज़ल आदमी के साथ नंगे पांव…
1 दर्द का इतिहास है हिन्दी ग़ज़ल एक शाश्वत प्यास है हिन्दी ग़ज़ल प्रेम, मदिरा, रूप की बातें भरी अब नहीं बकवास है हिन्दी ग़ज़ल आदमी के साथ नंगे पांव…
1 हमें अक्सर ये दुनिया अजनबी मालूम होती है बड़ी ही अनमनी सी ज़िंदगी मालूम होती है तबस्सुम में भी कोई बेबसी मालूम होती है निगाहों में सिसकती …
माँ ब्रह्मजीत गौतम उम्र अधिक है, तन जर्जर है माँ फिर भी सबसे सुंदर है माँ से ही घर होता घर है वरना तो केवल खँडहर है ममता, प्रेम, दया,…
ग़ज़ल पंकज सिद्धार्थ माँ अपनी संतान के सर पर आँचल को फैलाती है धूप में शीतल छाया देकर सुख उसको पहुँचाती है आशीर्वाद के फूल निछावर उसपर करती रहती है…
ग़ज़ल डॉ. अफ़रोज़ आलम ऐ मां मुझे करनी है सिफ़त तेरी रक़म आज हैरान है मेरी अक़्ल, परेशान है क़लम आज मिलती है शब ओ रोज़ मुझे तेरी दुआएं मैं…
मां अनिरुद्ध सिन्हा सच पूछो तो ममता की जंज़ीर चुरा ली है मैंने माँ से माँ की ही तस्वीर चुरा ली है कुछ बिखरी उम्मीदों ने तक़दीर चुरा ली है…
ग़ज़ल वशिष्ठ अनूप तिनके तिनके हमेशा जुटाती रही एक घर अपने मन में बनाती रही दूध और भात हर दिन कहाँ था सुलभ किंतु मां चंदा मामा बुलाती रही नेह…
ग़ज़ल रवि खण्डेलवाल घर के अंदर माँ रहती है, माँ के अंदर घर बिन माँ के सूनी दीवारें, सूना घर का दर माँ ही ऐसी होती जो दुनिया के दुख…
ग़ज़ल विकास जिस घर में माँ का साया है कौन उसे दुख दे पाया है माँ के चरण कमल के नीचे दुनिया की स्नेहहिल छाया है चाहे जितनी पीड़ा सह…
ग़ज़ल डाॅ. अंजनी कुमार सुमन नेमत है मन्नत है रब है सच में चारों धाम है माॅं हर बच्चे का काबा काशी अल्लाह यीशू राम है माॅं ममता की कोमल…