विशिष्ट कवयित्री : रुचि भल्ला

माफ़ीनामा मैं क्षमाप्रार्थी हूँ दुनिया के सारे बच्चों के प्रति कि उन्हें मारा गया छोटी -छोटी बातों पर हाथ उठाया उनकी छोटी गल्तियों पर उन्हें चोट देते रहे जबकि बड़ी…

विशिष्ट कवि : शरद कोकास

धुएँ के खिलाफ अगली शताब्दि की हरकतों से पैदा होने वाली नाजायज़ घुटन में सपने बाहर निकल आयेंगे परम्परिक फ्रेम तोड़कर कुचली दातून के साथ उगली जाएँगी बातें मानव का…

विशिष्ट कवयित्री : मीरा श्रीवास्तव

स्त्रियाँ कहीं से आएँ स्त्रियाँ कहीं से आएँ कहीं भी जाएँ तनाव, खीझ, झुँझलाहट की परत चिकने , महीन फेस पाउडर की तरह फैली होती है उनके चेहरे पर अॉटो…

विशिष्ट कवि : मुकेश कुमार सिन्हा

अजीब सी लड़कियां वो अजीब लड़की सिगरेट पीते हुए साँसे तेज अन्दर लेती थी चिहुँक कर आँखे बाहर आने लगती हैं पर खुद को संभालते हुए, खूब सारा धुंआ गोल…

विशिष्ट कवि : संतोष श्रेयांस

पुनरावृति एक दुसरे के एहसासों से लदे हम लौट आते हैं हर बार एक दुसरे के पास पहले से लड़ी बड़ी लडाइयों के बावजूद कई दिनों की मुह फुलाई के…

विशिष्ट कवयित्री : अपर्णा अनेकवर्णा

आलता लाल एक जोड़ी घिसे पाँव निकल पड़े हैं आदिम दिशा को कर आई विदा जिन्हें बस कल ही वो पलटे नहीं न ठिठके न ही बदली दिशा अपनी पुकारता…