विशिष्ट कवि : शरद कोकास
धुएँ के खिलाफ अगली शताब्दि की हरकतों से पैदा होने वाली नाजायज़ घुटन में सपने बाहर निकल आयेंगे परम्परिक फ्रेम तोड़कर कुचली दातून के साथ उगली जाएँगी बातें मानव का…
धुएँ के खिलाफ अगली शताब्दि की हरकतों से पैदा होने वाली नाजायज़ घुटन में सपने बाहर निकल आयेंगे परम्परिक फ्रेम तोड़कर कुचली दातून के साथ उगली जाएँगी बातें मानव का…
स्त्रियाँ कहीं से आएँ स्त्रियाँ कहीं से आएँ कहीं भी जाएँ तनाव, खीझ, झुँझलाहट की परत चिकने , महीन फेस पाउडर की तरह फैली होती है उनके चेहरे पर अॉटो…
सफेद झूठ तस्वीर के इस तरफ खड़ी मैं बताती रही उसे कि यह बिल्कुल साफ और सफेद है तस्वीर के उस तरफ खड़ा वह मानने से करता रहा इंकार कहता…
अजीब सी लड़कियां वो अजीब लड़की सिगरेट पीते हुए साँसे तेज अन्दर लेती थी चिहुँक कर आँखे बाहर आने लगती हैं पर खुद को संभालते हुए, खूब सारा धुंआ गोल…
पुनरावृति एक दुसरे के एहसासों से लदे हम लौट आते हैं हर बार एक दुसरे के पास पहले से लड़ी बड़ी लडाइयों के बावजूद कई दिनों की मुह फुलाई के…
एक मौन प्रार्थना बड़ी अदभुत है मौन की भाषा भी कहने वाले ने अपनी बात कह भी दी… और मान लिया कुछ बिन्दुओं को उकेर कर कहा है जो भी…
आलता लाल एक जोड़ी घिसे पाँव निकल पड़े हैं आदिम दिशा को कर आई विदा जिन्हें बस कल ही वो पलटे नहीं न ठिठके न ही बदली दिशा अपनी पुकारता…
विशिष्ट कवि : शहंशाह आलम घाटी के नीचे घाटी घाटी के नीचे की घाटी के बारे में सबको पता नहीं है सदियों से दुर्बल के भीतर रहता है एक और…
………………………………………………. संप्रत्ति – मंदसौर, मध्यप्रदेश
___________________________ पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर कविताएं, समीक्षाएं व अनुवाद प्रकाशित. अब तक तीन काव्य संग्रह. पता : 233, हरिपुरा विदिशा, मो. 9425034312 email – brajshrivastava7@gmail.com