विशिष्ट कवि :: डॉ.विमलेंदु सिंह

डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह की चार कविताएं ढेर सारे अक्टूबर  मैं अपने ऊपर का आकाश बदल दूंगा अब, छूट जाएंगी बहुत बातें, यहीं रह जाएंगी, क्वार की उमस, कपासी मेघ,…

विशिष्ट कवि :: राइडर राकेश

भादो में भुनेसर राइडर राकेश अंतिम भादो की इस आधी रात टिटहरी के द्रुत-मद्धम ताल के बीच बूंदें उतरने की आवाज़ें आ रही हैं घास, डिब्बे, पत्ते, टीन, पानी और…

विशिष्ट कवि :: श्रवण कुमार

श्रवण कुमार की तीन कविताएँ  सपने आज जबकि पॉश इलाके में रात में ही दिखता है दिन से बेहतर उजाला डोमा पोखर मोहल्ले में जैसे-तैसे रहती काकी की आँखों में…

विशिष्ट कवयित्री :: प्रभा मजूमदार

संबल (1) मेरे पास सेनाएँ नहीं संबल है जागीरें, धरोहरें, वसीयतनामे नहीं कुछ संकल्प और स्वप्न हैं खेत खलिहान बाग बगीचे मिल कारखाने उद्योग-तंत्र नहीं ऊर्जा से भरे सिर्फ अपने…

विशिष्ट कवि :: डॉ. महेंद्र मधुकर

पृथ्वी-पत्र तुमने लिखी है पृथ्वी मेरे नाम ! हरियाली उड़ेल दी तुमने नदी-नद के छोर वशवर्ती मेरे पत्ते, वृक्ष सहोदर से बढ़े मेरे साथ !   मेरे स्पर्श की उष्णता…

विशिष्ट कवयित्री : स्वाति शशि

मैं तुमसे मिलना चाहती हूं मैं तुमसे मिलना चाहती हूं सिर्फ़ एक बार मैं जानना चाहती हूं जवाब अपने बहुत सारे सवालों का मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ   बीते…