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विशिष्ट गीतकार : ज्ञान प्रकाश आकुल
(1) जितने लोग पढ़ेंगे पढ़कर, जितनी बार नयन रोयेंगे समझो उतनी बार, गीत को लिखने वाला रोया होगा। सदियों की अनुभूत उदासी यूँ ही नहीं कथ्य में आयी आँसू आँसू…
विशिष्ट गीतकार : अवनीश त्रिपाठी
दिन कटे हैं धूप चुनते रात कोरी कल्पना में दिन कटे हैं धूप चुनते। प्यास लेकर जी रहीं हैं आज समिधाएँ नई कुण्ड में पड़ने लगीं हैं क्षुब्ध आहुतियां कई…
विशिष्ट गीतकार : अनिरुद्ध सिन्हा
रात हुई तो सूरज निकला मन का सपना है झूठ बड़ा है सच छोटा है वर्षों की उतरन तन से ज़्यादा झेल रहा मन जीवन की सीलन जलकुंभी-सा लिपट रहा…
