Skip to content
Thu, Jul 9, 2026
AANCH

हिंदी साहित्य की मासिक इ-पत्रिका

Advertisment Image
  • आलेख
  • कविता
  • कहानी
  • खास कलम
  • ग़ज़ल
  • गीत
  • समीक्षा
    • पुस्तक समीक्षा
    • फिल्म समीक्षा
  • बच्चों का कोना
  • रंगमंच
  • सेहत
  • हास्य-व्यंग्य
  • लघुकथा
बच्चों का कोना -

बच्चों का कोना : विकास की राह पर भारत 

August 15, 2020

विकास की राह पर भारत

भारत एक विकासशील देश है।  इस वर्ष भारत ने अपनी स्वतंत्रता के 74 वें वर्ष में कदम रखा है।  लेकिन क्या यह वास्तव में स्वतंत्र है?  15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली लेकिन क्या यह आत्मनिर्भर है?  भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है आत्मनिर्भर  भारत।  भारत को अपनी जरूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए तथा विकसित होने के लिए पहली शर्त आत्मनिर्भर होना है।  गांधीजी इस विचार में दृढ़ विश्वास रखते थे।  इस साल, कुछ महीने पहले, हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अभियान चलाया था।  इसमें विभिन्न योजनाएं और नीतियां शामिल हैं।  भारत ने स्वतंत्रता के बाद की घटनाओं से उबरने और विकसित होने में इन कई वर्षों का समय लिया है।  यह कोरोना वायरस का समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक झटका है।
 कोविद -19 और लॉकडाउन के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ है।  आत्मनिर्भर  भारत अभियान भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान पर केंद्रित है।  इस अभियान के पांच स्तंभ अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, प्रणाली, जीवंत जनसांख्यिकी और मांग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।  सरकार की नीति उनके चारों ओर घूमती है।
 भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे आसान तरीका आयातों को कम करना और घरेलू स्तर पर वस्तुओं का निर्माण करना है।  लोगों को स्थानीय उत्पादों को खरीदने और उपयोग करने के लिए आश्वस्त होना होगा।  निर्यात बढ़ाने की जरूरत है।  पारंपरिक हस्तशिल्प और कला को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।  कुटीर और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।  मेड इन इंडिया के सामानों का उपयोग करते समय प्रत्येक भारतीय दिल में गर्व की भावना उभरनी चाहिए।  लोगों के नजरिए को बदलने की जरूरत है।  विदेशी निर्मित उत्पाद के उपयोग को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।  हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले कई उत्पाद भारत में नहीं बने हैं।  कुछ चीजें हैं, जो पूरी तरह से आयात की जाती हैं।  विदेशी मुद्रा आवश्यक है लेकिन भारत को स्वयं के द्वारा अधिक से अधिक माल का उत्पादन करने का प्रयास करना चाहिए।  इसके लिए उद्योगों को स्थापित करने की जरूरत है।
 लेकिन हम इसमें क्या कर सकते हैं?  लोगों की भागीदारी हर लोकतंत्र की आधारशिला है।  यह वही है जो एक देश को विकसित करता है और एक अभियान सफल होता है।  भारत तभी विकसित होगा जब वह हर नागरिकों का विकास करेगा।  मैक्रोइकॉनॉमिक्स सूक्ष्मअर्थशास्त्र पर बहुत निर्भर करता है।  दूसरे शब्दों में, हम नागरिकों के रूप में जो करते हैं, वह भारत को एक राष्ट्र के रूप में प्रभावित करेगा।  भारत तभी आत्मनिर्भर बनेगा जब हम, भारतीय आत्मनिर्भर बनेंगे।  आयातित चीजें खरीदना अब एक प्रवृत्ति नहीं है।  स्वदेशी वही है जिसके बारे में हर कोई बात कर रहा है।  सभी को इसे समझना होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था और भारत के विकास में उनकी भूमिका को समग्र रूप से देखना होगा।  गांधीजी ने एक बार कहा था कि हमें कोई काम करते वक्त  सबसे गरीब और  कमजोर आदमी के बारे में सोचना चाहिए कि मैं जो काम कर रहा हूँ उससे उस ग़रीब आदमी को कितना फ़ायदा होगा ।  जब लोगों को भारतीय अर्थव्यवस्था को चलाने में उनके महत्व का पता चलेगा, तभी वे भारत के बारे में खुद से ज्यादा सोचना शुरू करेंगे।  एक  देश को कभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं किया जा सकता है, हमेशा प्रगति की गुंजाइश होती है।  अगर हर कोई पहले, अपने या अपने से पहले, राष्ट्र के बारे में सोचना शुरू कर दे, तो भारत का विकास  कभी नहीं रूकेगा।
आद्या भारद्वाज, कक्षा  -दसवीं, प्रभात तारा स्कूल, मुजफ्फरपुर, बिहार
Tagged अड़तीससवां संस्करण

Post navigation

⟵ विशिष्ट कवि :: संजय शांडिल्य
साक्षात्कार :: अवधेश प्रीत ⟶

Related Posts

भारत मां का सोना बेटा ‘नीरज’ :: उत्प्रभ उपमान

भारत मां का सोना बेटा ‘नीरज’                           -उत्प्रभ उपमान आपने भाला फेंक कर रचा इतिहास । 7 अगस्त…

चूहा-बिल्ली संवाद :: डॉ. भावना

चूहा-बिल्ली संवाद                  – डॉ भावना चूहे ने बिल्ली से कहा- तुम सताती रही हो, सदियों से हमें है, तुम्हारा जमाना अब लद…

जादू की छड़ी – इला प्रवीण

एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी। शालू घबराकर उठ गई। उसने देखा कि खिडकी के पास एक…

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संपादकीय

संपादकीय –

 

 

संपादकीय –

बदलती जीवनशैली और झुलसती प्रकृति

गर्मी अपने चरम पर है। इस मौसम में बिजली की आंख-मिचौली भी लगातार जारी है। गेहूं की कटाई के बाद उसके सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी भी किसान इसी महीने निभाते हैं। कड़ी धूप में गेहूं को सुखाकर, गेहूं के भूसे और नीम के पत्तों के साथ कोठी (अनाज रखने का पात्र) में बड़े ही जतन से अनाज को रखा जाता है। यह धूप जहां लीची में मिठास भरने के लिए आवश्यक है, वहीं अमोल (टिकोले) को पककर आम बनने के लिए भी जरूरी है। कुदरत ने हमें गर्मी के महीने को उसकी पूरी खूबसूरती और जीवंतता के साथ जीने का संदेश दिया है।
स्कूल और कॉलेजों में भी लगभग ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टियां) शुरू हो चुकी है। लोग घरों में दिन-रात एसी चलाकर पड़े रहते हैं। तरक्की की सुविधा मिली है, तो उसका लाभ जरूर उठाना चाहिए, लेकिन एक सीमा में। आपको कोरोना का वह भयावह दौर याद होगा, जब एसी में रहने वाले अधिकांश लोग अधिक गंभीर स्थिति में पहुंच गए थे। तब डॉक्टरों ने भी एसी का प्रयोग कम करने की हिदायत दी थी।
गर्मी के मौसम में गर्मी का आनंद न लेकर, कृत्रिम रूप से वसंत (ठंडक) लेकर बैठना कहीं से भी मुनासिब नहीं है। एक तरफ हम एसी के आदी हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ पसीना बहाने के लिए जिम जा रहे हैं। जब कुदरत खुद हमारे शरीर से पसीना निकालकर उसे शुद्ध करना चाहती है, तो वह हमें पसंद नहीं आता। अंधानुकरण की यह होड़ मनुष्य को पतन (रसातल) की ओर ले जा रही है।
आज कोई भी रुककर सोचने को तैयार नहीं है। पृथ्वी रहे या भाड़ में जाए, बस दिखावे की होड़ मची है- “उसने एसी खरीदा है, तो मैं भी लूंगा; उसने नया फ्रिज लिया है, तो मुझे भी लेना है; मोबाइल एक साल से ज्यादा नहीं चलाना क्योंकि नए फीचर्स आ गए हैं.. इत्यादि-इत्यादि। नकल भी अगर अकल के साथ हो, तभी अच्छी लगती है; वरना बिना सोचे-समझे की गई नकल सिर्फ नुकसान ही पहुंचाती है। इसलिए आइए, मिलकर पृथ्वी को बचाएं और कुदरत के हर मौसम का स्वाभाविक आनंद लें।

  • डॉ भावना

हमारे बारे में

आंच व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है. इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं. लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है
यह पत्रिका प्रत्येक महीने की एक तारीख को प्रकाशित की जाती है. कृपया रचनाएं इमेल पर भेजें. रचनाओं के मौलिक व किसी अंतरजाल पर प्रकाशित नहीं होने का प्रमाण भी संलग्न करें.
इमेल – bhavna.201120@gmail.com ,vinay.prabhat@gmail.com

संपादक –            भावना
संपादकीय टीम – विनय कुमार, संतोष सारंग
कला व परिवर्धन – अरुप सरकार

संस्करण
अट्ठाइसवां संस्करण (20) अठहत्तरवां अंक (10) अड़तीससवां संस्करण (13) अड़सठवां अंक (9) अनठावनवां संस्करण (13) उनतीसवां संस्करण (10) उनसठवां संस्करण (10) उनहत्तरवां अंक (11) उनहत्तरवा संस्करण (10) उन्नीसवां संस्करण (10) एकहत्तरवां और बहत्तरवां संस्करण (23) ग्यारहवां संस्करण (9) चतुर्थ संस्करण (15) चौवालीसवां संस्करण (10) चौसठवां और पैसठवां अंक (11) चौहत्तरवां-पचहत्तरवां अंक (11) चौहत्तरवां अंक (11) छठा संस्करण (11) छत्तीसवां संस्करण (10) छप्पनवां अंक (9) छब्बीसवां संस्करण (9) छियत्तरवां अंक (9) छियासठवां अंक (10) छिहत्तरवां अंक (12) तिरपनवां संस्करण (9) तिहत्तरवां अंक (19) पचहत्तरवा अंक (9) पच्चीसवां संस्करण (9) पांचवां संस्करण (10) पैतीसवां संस्करण (22) बत्तीसवां संस्करण (10) बहत्तरवां अंक (12) बाइसवां संस्करण (9) बावनवां संस्करण (10) मई-जून संयुक्तांक (9) संयुक्त संस्करण (बीस और इक्कीस) (58) संयुक्त संस्करण (सत्तरह एवं अठारह) (9) संयुक्तांक (उनचास और पचास) (46) संयुक्तांक (चौवन-पचपन} (11) संयुक्तांक (पैतालीस और छियालीस) (11) संयुक्तांक (सतहत्तर और अठहत्तरवां संस्करण) (9) संयुक्तांक (साठ-बासठ) (14) संयुक्तांक (सैतालीस और अड़तालीस) (9) सड़सठवां अंक (11) सनतावनवां अंक (10)
संस्करण
  • Uncategorized
  • आपके पत्र –
  • आलेख
  • कविता – विशिष्ट कवि
  • कहानी – विशिष्ट कहानीकार
  • खास कलम –
  • ग़ज़ल – विशिष्ट ग़ज़लकार
  • गीत – विशिष्ट गीतकार
  • पुस्तक समीक्षा –
  • फिल्म समीक्षा –
  • बच्चों का कोना –
  • रंगमंच –
  • लघुकथा
  • संपादक की कलम से
  • संपादकीय
  • सेहत –
  • हास्य-व्यंग्य –
ट्रेंडिंग
खास कलम -

ख़ास कलम :: हेमा सिंह

admin May 26, 2026

हेमा सिंह की चार कविताएं सौ सौ बार विचार करो नारी   को   बेचारी   कहने  से  पहले मन में अपने सौ-सौ बार विचार करो !   नारी  भी  तो  जग में …

खास कलम -

ख़ास कलम :: डॉ कृष्ण कन्हैया

admin January 8, 2026

शून्य एक दिन, तुमने कहा था- मैं शून्य हूँ- तुम अंक हो गणित की भाषा में – एक पिछड़ा प्रसंग हो   संख्या के चक़्क़र में ऐसा उलझा कि- ज़िंदगी…

खास कलम -

दुष्यंत के सीने में जलती आग : डॉ अभिषेक कुमार

admin September 22, 2025

दुष्यंत के सीने में जलती आग  डॉ अभिषेक कुमार   अगर वास्तव में तुम दुष्यंत के सीने में जलती आग को महसूस करना चाहते हो तो कभी जाकर देखो उस…

AANCH
खास कलम -

दुष्यंत की कविता : डॉ. पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

admin September 22, 2025

दुष्यंत की कविता हिन्दी ग़ज़ल के स्थापक दुष्यंत कुमार अपने समकालीन साहित्यकारों के बारे में भी कविताएं लिखा करते थे, आज वे रचनाएं महत्त्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज हैं । जिनके माध्यम…

Copyright © 2026 | Spotlight News by Ascendoor | Powered by WordPress.