पुस्तक समीक्षा : सवा लाख की बाँसुरी

पुस्तक समीक्षा : सवा लाख की बाँसुरी – सत्यम भारती ‘दर्द, विरह, आँसू, घूटन अगर न होते मित्र, तो फिर कवि होता नहीं दीनानाथ सुमित्र ।’ स्वभाव से अक्खङ, बातों…

पुस्तक समीक्षा : – डाॅ. भावना

भावनाओं का प्रतिबिंब : कई-कई बार होता है प्रेम – डाॅ. भावना “कई -कई बार होता है प्रेम“ प्रगतिशील, प्रतिबद्ध एवं प्रयोगधर्मी यवा कवि अशोक सिंह का सद्य प्रकाशित काव्य-संग्रह…

रोचकता की खुशबू से पन्ने महक रहे : पारुल सिंह

  रोचकता की खुशबू से पन्ने महक रहे : पारुल सिंह “यायावर हैं आवारा हैं बंजारे हैं”, ये किताब हाथ में लेते ही मुझे बहुत भा गई। सुंदर कवर, हल्का…

पुस्तक समीक्षा :: डॉ सपना तिवारी

वर्तमान यथार्थ का : ‘अनकही अनुभूतियों का सच’ वस्तुतः काव्य मानवीय संवेदना की भावाभिव्यक्ति है, जिसमें समग्र यथार्थ के साथ तदात्म्य स्थापना की प्रक्रिया चलती रहती है। कविता का काम…

हस्तीमल हस्ती की ग़ज़लें प्रगतिशील जीवन मूल्यों का दर्पण : अनिरुद्ध सिन्हा

हस्तीमल हस्ती की ग़ज़लें प्रगतिशील जीवन मूल्यों का दर्पण : अनिरुद्ध सिन्हा सामान्य धारणा है कि हस्तीमल हस्ती ग़ज़ल-विधा पर विचार करनेवाले ग़ज़लकार हैं। इनकी ग़ज़लें सृजन और समय की…

पुस्तक समीक्षा : डॉ.भावना

संवेदना को झकझोरती ग़ज़लें – शिखरों के सोपान                                                                                     – डॉ.भावना  ग़ज़ल की बात आती है तो बरबस ही प्रेम याद आता है, प्रेम में बीता पल याद आता है…

पुस्तक समीक्षा : अनिरुद्ध सिन्हा

डी.एम.मिश्र की ग़ज़लें लोक-जीवन का काव्यात्मक अंकन हैं डी.एम.मिश्र की ग़ज़लें अपने स्वगत चिंतन और आत्मानुभूति के लोक में स्वछंद विहार करती हुई नज़र आती हैं। इसका प्रमुख कारण है…

पुस्तक समीक्षा : परवाज-ए-ग़ज़ल

गहन संवेदना का प्रखर दस्तावेज परवाज-ए-ग़ज़ल गजल जब अपने परंपरागत ढांचे को तोड़ते हुए  रूहानियत और रूमानियत के सिंहासन से उतरकर किसी झोपड़ी के चौखट की पीड़ा के प्रति जवाबदेह…

पुस्तक समीक्षा : अनिरुद्ध सिन्हा

मानवीय संवेदना के रस से युक्त”अभी तुम इश्क़ में हो” छंदमुक्त कविता के जिस दौर में लोग मांग के अनुसार कविता लिख रहे हों, उस दौर में अगर कोई अपने…

पुस्तक समीक्षा : मुकेश दुबे

रूमानी कलेवर में गंभीर चिंतन सहेजती कहानियाँ डार्क चॉकलेटी आवरण पर रखा कप, कप से उठती भाप में नज़र आते दो दिल और सुर्ख गुलाब ! काफ़ी हैं महसूस कराने…