विशिष्ट कवि :: श्यामल श्रीवास्तव

वायरस जानते हो समय भूमंडलीकरण में जितने हम-सब पास-पास आयें थे उतने ही दूर होते जा रहे हैं इंसान अपने हाथों अपनी सभ्यता को नष्ट करने पे तुला है एक…

विशिष्ट कवयित्री : मालिनी गौतम

मालिनी गौतम …………………………………………………..  कहा-अनकहा कुछ आँसू अपने सर्वाधिक प्रिय व्यक्ति से भी छुपा लिए गये, निविड़ अंधकार के प्रगाढ़ क्षणों में अधरों पर फैली हल्की स्मित रेख के पीछे वे…

विशिष्ट कवयित्री : डॉ प्रतिभा सिंह  

अहल्या सुनो राम ! पूरी दुनियाँ जानती थी कि दोषी इंद्र था पर मुझे ही क्यों श्राप का भागी बनाया गौतम को महर्षि बनने का लालच था या सामाजिक भय…

विशिष्ट कवि : असलम हसन

मुश्किल है आसाँ होना कितना मुश्किल है आसाँ होना फूलों की तरह खिलखिलाना चिड़ियों की तरह चहचहाना कितना मुश्किल है सुनना फुर्सत से कभी दिल की सरगोशियाँ और देखना पल…

विशिष्ट कवयित्री :: रंजीता सिंह

  मन की स्लेट औरतों  के  दुःख बड़े  अशुभ  होते  हैं और  उनका  रोना बड़ा  ही  अपशकुन   दादी  शाम  को घर  के  आंगन  में लगी  मजलिस  में  , बैठी …

विशिष्ट कवयित्री :: मृदुला सिंह

वसंत और चैत वसंत जाते हुए ठिठक रहा है कुछ चिन्तमना धरती के ख्याल में डूबा मुस्काया था वो फागुन के अरघान में जब गुलों ने तिलक लगाया था अब…

नारी चेतना के दोहे : हरेराम समीप

नारी चेतना के दोहे : हरेराम समीप हर औरत की ज़िंदगी, एक बड़ा कोलाज इसमें सब मिल जाएँगे, मैं, तुम, देश, समाज नारी तेरे त्याग को, कब जानेगा विश्व थोड़ा…

विशिष्ट कवयित्री :: डॉ राजवंती मान

सामर्थ्य मुझ पर विश्वास रखो मेरी दोस्त ! मैं तुम्हारे शिथिल / मरणासन्न अंगों को उद्दीप्त करुँगी करती रहूंगी भरती रहूंगी / तुम्हारी पिचकी धमनियों में अजर उमंगें लहू में…