विशिष्ट कवि :: अभिषेक चंदन उर्फ ऋषि कुमार
मां की भौगोलिक दुनिया अभिषेक चंदन उर्फ ऋषि कुमार और इस घर में क्या रखा है अपनी इच्छाओं की कचोट पर हमारे सपनों का मुल्लमा चढ़ा रखा है घर के…
मां की भौगोलिक दुनिया अभिषेक चंदन उर्फ ऋषि कुमार और इस घर में क्या रखा है अपनी इच्छाओं की कचोट पर हमारे सपनों का मुल्लमा चढ़ा रखा है घर के…
कस्तूरबा मधुकर वनमाली बड़े नसीब वाले थे बापू उन्हें तुम जो मिली थी,बा और तुम्हारा यह नाम कहलाती तुम जो,माँ न तो उन का दिया और न हीं उन के…
बारिश की पहली फुहार डॉ पंकज कर्ण प्रेम से उपजे जज़्बातों सूरज की किरणों एवं कसमसाते हुए सागर के ज्वार-सा प्रलयकारी समय जब हार जाता है अपनी ही चौखट पर,…
सबसे पहले माँ ब्रज श्रीवास्तव माँ केवल माँ नहीं है सुखद उपस्थिति है किसी जज़्बात का माँ कोई जन्नत नहीं है वह तो खालिस धरती है धरती पर मौजूद घर…
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से ■ शहंशाह आलम बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से बचपन में हम सब कितनी दफ़ा निकल जाते थे…
परछाई अंत तो प्रारंभ में है। सहज कर्म यात्रा, द्वंद्व मुक्त नहीं होती। बीज से- फल-फूल। आसमान में छत नहीं, पेड़ के लिए सूरज होता है। पृथ्वी अनंत काल से-…
खराबियां भी कविताओं में आ जातीं हैं खराबियां भी कविताओं में आ जातीं हैं ताकि सनद रहे खराब लोगों की चालाकियां इस तरह आतीं हैं कविताओं में जैसे कोई राक्षसी…
खुर घर में धान आते ही बैलों के खुर याद आए हल चलाते समय गदबेर में कट चुका था गोहट मारना बाकी था खुर में खून लथपथ था …
दुःख दुःख पानी है जो आँखों से बहता है जिस तरह पानी के कई रास्ते होते हैं दुःख के भी होते हैं घरों की तरफ़ जाते और ये घर कैसे…
पानी वह प्यासा बच्चा दौड़ता हुआ आता है खेल छोड़कर अँजुरी भर पानी पीता है इस सार्वजनिक नल से उसे ओस की तरह पीता है बारिश की तरह पीता…