विशिष्ट गीतकार : रंजन कुमार झा

रंजन कुमार झा (1) व्याधि तुझे तो आना ही था सँग कुदरत के इन मनुजों ने जो  निर्मम व्यवहार किया है भू, जंगल, पर्वत, नदियों पर जितना  अत्याचार किया है…

विशिष्ट गीतकार : मंजू लता श्रीवास्तव

धन्य ये प्राण हो गए हाट हुए हैं बंद घाट सुनसान हो गए जीवन के अवरुद्ध सभी अभियान हो गए   था स्वतंत्र अब तक यह जीवन अपनी शर्तों पर…

विशिष्ट गीतकार : शुभम् श्रीवास्तव ओम

काँपता है गाँव गाँव में कुछ लोग लौटे हैं शहर से! हैं वही परिचित वही अपने-सगे हैं पाँव छूकर फिर गले सबके लगे हैं रोज के निर्देश से कुछ बेखबर…

विशिष्ट गीतकार :: डॉ मंजू लता श्रीवास्तव

(1) पतझर पर कोंपल संदेश लिख रहे माघ-अधर जीवन उपदेश लिख रहे डाल-डाल तरुवों पर सरगम के मधुर बोल आशा के पंथ नये मौसम ने दिये खोल समय फिर पटल…

विशिष्ट गीतकार :: डॉ संजय पंकज

दो गीत : संदर्भ पर्यावरण 1. कंकरीट के जंगल में चली उजाले की आँधी हरियाली को लील गई! खिड़की से उतरा चंदा लोहे पर अटक गया है कंकरीट के जंगल…

विशिष्ट गीतकार :: धीरज श्रीवास्तव

(1) क्या रक्खा अब यार गाँव में! नहीं रहा जब प्यार गाँव में! बड़कन के दरवाजे पर है खूँटा गड़ा बुझावन का!  फोड़ दिया सर कल्लू ने कल  अब्दुल और…

विशिष्ट गीतकार :: अवनीश सिंह चौहान

देवी धरती की दूब देख लगता यह सच्ची कामगार धरती की मेड़ों को साध रही है खेतों को बाँध रही है कटी-फटी भू को अपनी- ही जड़ से नाथ रही…

विशिष्ट गीतकार : जय चक्रवर्ती

1 आदमी थे हम छोडकर घर-गाँव, देहरी–द्वार सब आ बसे हैं शहर मे इस तरह हम भी प्रगति की दौड़ को तत्पर हुए.   चंद डिब्बों मे ‘गिरस्ती’ एक घर…

विशिष्ट गीतकार :: गरिमा सक्सेना

(1) प्रिये तुम्हारी आँखों ने कल दिल का हर पन्ना खोला था दिल से दिल के संदेशे सब होठों से तुमने लौटाये प्रेम सिंधु में उठी लहर जो कब तक…