विशिष्ट गीतकार : मंजू लता श्रीवास्तव

धन्य ये प्राण हो गए हाट हुए हैं बंद घाट सुनसान हो गए जीवन के अवरुद्ध सभी अभियान हो गए   था स्वतंत्र अब तक यह जीवन अपनी शर्तों पर…

विशिष्ट गीतकार : शुभम् श्रीवास्तव ओम

काँपता है गाँव गाँव में कुछ लोग लौटे हैं शहर से! हैं वही परिचित वही अपने-सगे हैं पाँव छूकर फिर गले सबके लगे हैं रोज के निर्देश से कुछ बेखबर…

विशिष्ट गीतकार :: डॉ मंजू लता श्रीवास्तव

(1) पतझर पर कोंपल संदेश लिख रहे माघ-अधर जीवन उपदेश लिख रहे डाल-डाल तरुवों पर सरगम के मधुर बोल आशा के पंथ नये मौसम ने दिये खोल समय फिर पटल…

विशिष्ट गीतकार :: धीरज श्रीवास्तव

(1) क्या रक्खा अब यार गाँव में! नहीं रहा जब प्यार गाँव में! बड़कन के दरवाजे पर है खूँटा गड़ा बुझावन का!  फोड़ दिया सर कल्लू ने कल  अब्दुल और…

विशिष्ट गीतकार : जय चक्रवर्ती

1 आदमी थे हम छोडकर घर-गाँव, देहरी–द्वार सब आ बसे हैं शहर मे इस तरह हम भी प्रगति की दौड़ को तत्पर हुए.   चंद डिब्बों मे ‘गिरस्ती’ एक घर…

विशिष्ट गीतकार :: गरिमा सक्सेना

(1) प्रिये तुम्हारी आँखों ने कल दिल का हर पन्ना खोला था दिल से दिल के संदेशे सब होठों से तुमने लौटाये प्रेम सिंधु में उठी लहर जो कब तक…