मौन को शब्द देने की संवदेशीलता मौत का जिंदगीनामा :: मनीष शुक्ला

मौन को शब्द देने की संवदेशीलता मौत का जिंदगीनामा मनीष शुक्ला कहते हैं कि स्त्री, संवेदनशीलता का ईश्वर द्वारा दिया गया सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। और उस पर यदि वह रचनाकार…

कला में चिंतन का दृष्टि बोध :: डा.अफ़रोज़ आलम

कला में चिंतन का दृष्टि बोध डा.अफ़रोज़ आलम   एक बुकलेट के रूप में अपने सुंदर कलेवर में आकर्षित करती है ये छोटी सी पुस्तक। इसके अंदर की सामग्री में…

मानव मन के गहरे अँधरे कोनों की पड़ताल करता उपन्यास – दृश्य से अदृश्य का सफ़र :: पंकज सुबीर

  मानव मन के गहरे अँधरे कोनों की पड़ताल करता उपन्यास – दृश्य से अदृश्य का सफ़र पंकज सुबीर हिन्दी कथा संसार का दायरा वैसे तो दिनों-दिन विस्तृत होता जा…

विजय कुमार स्वर्णकार की ग़ज़लों में जीवन के विविध रूपों की अभिव्यक्ति हुई है :: अनिरुद्ध सिन्हा 

विजय कुमार स्वर्णकार की ग़ज़लों में जीवन के विविध रूपों की अभिव्यक्ति हुई है                                 …

जीवन के सभी रसों और रंगों में भीगी कविताएँ :: सुधा ओम ढींगरा

जीवन के सभी रसों और रंगों में भीगी कविताएँ सुधा ओम ढींगरा रेखा भाटिया का नया काव्य संग्रह ‘सरहदों के पार दरख़्तों के साये में’ मिला। एक ही बैठक में…

अपनी राह स्वयं बनाता : रथ के धूल भरे पाँव :: नीरज नीर

अपनी राह स्वयं बनाता : रथ के धूल भरे पाँव नीरज नीर प्रांजल भाषा और शब्दज्ञान के धनी अजित राय की कविताओं से गुजरते हुए यह निःसंदेह ज्ञात होता है…

जन सरोकारों से लबरेज़ ग़ज़लों का गुलदस्ता :: डॉ भावना

जन सरोकारों से लबरेज़ ग़ज़लों का गुलदस्ता :: डॉ भावना “प्यास ही प्यास” बी आर विप्लवी  का सद्य  प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह है, जो विप्लवी  प्रकाशन,  गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से छप…

स्त्री और प्रकृति के अंतर्संबंधों के गीत : सत्यम भारती

पुस्तक समीक्षा ………………………………………………….. स्त्री और प्रकृति के अंतर्संबंधों के गीत सत्यम भारती प्रकृति और स्त्री में  बहुत हद तक एकरूपता है, दोनों का उद्देश्य  परोपकार,  समर्पण, दया और सद्भाव रहा…