डाॅ. शांडिल्य रामानुजम की दो हास्य कविताएँ

डाॅ. शांडिल्य रामानुजम की दो हास्य कविताएँ

 

1.

पत्नी गूंगी, पति बहरा

एक दिन पत्नी ने कहा

अब मैं चुप रहूंगी

तुमको किसी भी तरह

कभी तंग नहीं करूंगी

 

तुम पर लगाऊंगी नहीं

किसी तरह की चुगी

तुम्हारे सामने बिल्कुल

बन कर रहूंगी गूंगी

 

पति बोला सच बोलती हो

हर बात सुनेगी हमारी

भाग्य खुल गये मेरे

तू कितनी भोली और प्यारी

 

तुम जो हो गयी गूंगी

तो करूंगा तेरी पूजा

तेरे जैसा कोई भी

दुनिया में नहीं दूजा

 

मैंने भी कर दिया वादा

पत्नी से थोड़ा ज्यादा

बताऊं दिल का राज गहरा

फिर मैं भी रहूंगा बहरा

 

2.

ये भी कोई बात हुई

दुबई दोहा घूम रहे हैं

एफिल टावर चूम रहे हैं

घर में बीबी पड़ी अकेली

ये भी कोई बात हुई

 

यार दोस्त सब ऑफिस जाते

रिश्तेदार भी खूब कमाते

ये बस टीवी देखे जाते

ये भी कोई बात हुई

 

मैं तो बस बर्तन घिसती हूं

घर के कामों में पिस्ती हूं

ये हर रोज पतंग उड़ाये

ये भी कोई बात हुई

 

मेरे बाल सफेद हुए हैं

चश्में भी अब चढ़े हुए हैं

ये रंग काले बाल उड़ाये

ये भी कोई बात हुई

खुद तो पैसे रोज उड़ाये

शर्ट-पैंट और जूते लाये

मेरी शॉपिंग से घबराए

ये भी कोई बात हुई

 

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