विशिष्ट गीतकार : वशिष्ठ अनूप
साँस रुक सी गयी साँस रुक सी गयी, थम गयीं धड़कनें तुमको देखा तो दिल मुस्कराने लगा। ये निगाहें ठगी -सी रहीं देखती इक अजब -सा नशा मुझपे छाने लगा!!…
साँस रुक सी गयी साँस रुक सी गयी, थम गयीं धड़कनें तुमको देखा तो दिल मुस्कराने लगा। ये निगाहें ठगी -सी रहीं देखती इक अजब -सा नशा मुझपे छाने लगा!!…
मेघ गरजा रात भर है, प्यार सचमुच में अमर है । कौन कहता है विरह में बस धरा दो टूक होती, क्या कहूँ कि नभ-हृदय में पीर कितनी, हूक होती;…
सखि आया देख बसंत पीत वसन को पहन पधारा लगता प्रिय ज्यों कंत आमों में मँजरिया डोले बागों में कोयलिया बोले मन में उठे उमंग नाचे सकल-दिगंत हे सखि…. भांति…
पतझर-सा यह जीवन जो था शांत, दुखद, बेहाल उसमें तुम फागुन-सा आकर प्रिय मल गए गुलाल गम को निर्वासित कर तुमने मेरा मोल बताया जो भी था अव्यक्त उसे अभिव्यक्त…
रात चाँदनी चुपके आई खिड़की से सिरहाने में! सुबह सुबह तक रही सुबकती लीन रही दुलराने में! पता नहीं क्यों लापता रही कितने दिन बेगानों-सी इधर रही पर मेरी हालत…
प्रिये! प्रीत की रीत तुमने न जानी विरह में समय ज्यों गुज़ारा हृदय जानता है हमारा हमेशा उदासीनता ही रही साथ बनकर सहारा व्यथा यह तुम्हारे लिए है कहानी तुम्हारे…
बहुत दिनों से तेरा-मेरा रिश्ता तना-तना सम्बंधों के बीच तना है कुहरा घना-घना इन्हें पिघल जाने दें अब तो समय बचा थोड़ा फिर से तार मिलायें दिल के जिसे कभी…
अब किसे क्या प्यार करना कल मेरा मुख पोंछती थी, ले दुपट्टे का किनारा आज बेचा आईने के हाथ कल का सच हमारा क्या भला तुमसे शिकायत, हाँ ये छोटा-सा…
बीती यादों के अनगिन सहारे लिए गीत मैंने लिखे हैं तुम्हारे लिए वो तुम्हारी छुअन का जो अहसास था मिल रही निज धरा से ही आकाश था मांग हमने गगन…
रात हुई तो सूरज निकला मन का सपना है झूठ बड़ा है सच छोटा है वर्षों की उतरन तन से ज़्यादा झेल रहा मन जीवन की सीलन जलकुंभी-सा लिपट रहा…