विशिष्ट गीतकार : चंद्रेश शेखर
तुम नदी के उस किनारे, और मैं इस पार बैठा यूँ हमारे बीच कोई खास तो दूरी नहीं है तैरना भी जानता हूँ,यह भी मजबूरी नहीं है नाव है,पतवार है,उद्दिग्न…
तुम नदी के उस किनारे, और मैं इस पार बैठा यूँ हमारे बीच कोई खास तो दूरी नहीं है तैरना भी जानता हूँ,यह भी मजबूरी नहीं है नाव है,पतवार है,उद्दिग्न…
(1) उमर की सीढ़ियाँ चढ़ते मुझे फिर याद आये तुम पुकारा है मुझे फिर से मनोरम झील के तट ने निमंत्रण उँगलियों को फिर दिया उड़ती हुई लट ने कई…
1 मैं भी खुदापरस्त हूँ, मेरे खुदा हो तुम हो प्यार के मसीहा, अहले-वफ़ा हो तुम हैं नाचते अधर पर, तुमसे मिले तरन्नुम तुम मुझमें खो रहे हो, मैं तुममें…
1 प्रेम प्रत्यंचा सँभाली भाववाही तीर साधे मन हुआ तरकश तिलिस्मी भावनाएँ भर अपरिमित दंड दृढ़ विश्वास का झुक चेतना अतिरेक संचित हो रहा कोदंड जीवन दहुदिशाएं देख हर्षित डोर…
मुक्तक 1 अाधार छंद:गीतिका छंद प्रीति की ही रीति का शुभ धाम है राधा-किशन प्रेम में लिपटी सुबह औ’र शाम है राधा-किशन दूर रहकर भी सदा जलता रहा जिसका दीया…
वसन्त आ गया ! कलियों की कनखियाँ, फूलों के हास क्यारियों के दामन में भर गया सुवास बागों में लो फिर वसन्त आ गया ! मलयानिल अंग- अंग सहलाता जाये…
दिन कटे हैं धूप चुनते रात कोरी कल्पना में दिन कटे हैं धूप चुनते। प्यास लेकर जी रहीं हैं आज समिधाएँ नई कुण्ड में पड़ने लगीं हैं क्षुब्ध आहुतियां कई…
(1) पथिक बनो दीये खुद पथ के वर्ना हरसू अंधकार है वज्र इरादों के शोलों सँग दीवाली हर निशा मनाओ पथ दुर्गम में पड़ी शिलाएँ तोड़ो-फेको, दूर हटाओ मांग वक्त…
एक गीत-ये हमारे प्रान बहुत मुश्किल से हवा में लहलहाते धान ये नहीं हैं धान , प्यारे ये हमारे प्रान ! जोंक पांवों में लिपटकर रही पीती खून, खुरपियों से…