है सूरज छिपा कहाँ पर – मुकेश कुमार सिन्हा
गांव और प्रकृति की संवेदनशील कवयित्री गरिमा सक्सेना – मुकेश कुमार सिन्हा आलोचकों की हमेशा शिकायत रहती है कि नई पीढ़ी साहित्य का बँटाधार कर रही है। नई पीढ़ी जो…
गांव और प्रकृति की संवेदनशील कवयित्री गरिमा सक्सेना – मुकेश कुमार सिन्हा आलोचकों की हमेशा शिकायत रहती है कि नई पीढ़ी साहित्य का बँटाधार कर रही है। नई पीढ़ी जो…
बाज़ारी अजगर बेच रहा जंगल अब शावक की खाल माँ अपने लालों को रख तू सम्भाल नयी-नयी विज्ञप्ति नये-नये रूप छाया तक बेच रही अब तीखी धूप फाँस रहा जीवन…
मुश्किल है आसाँ होना कितना मुश्किल है आसाँ होना फूलों की तरह खिलखिलाना चिड़ियों की तरह चहचहाना कितना मुश्किल है सुनना फुर्सत से कभी दिल की सरगोशियाँ और देखना पल…
रमेश ‘कँवल’ की ग़ज़लें 1 मुंह पे गमछा बाँधने की ठान ली गाँव ने दो गज़ की दूरी मान ली आपदाओं में भी अवसर खोजना यह कला भी देश…
मिल्टन से टकराता रहता रोज ईसुरी फाग के बहाने जंगबहादुर बंधु के दो गीतों पर मनोज जैन का समीक्षात्मक आलेख साहित्यिक विरादरी का शायद ही कोई शख्स ऐसा हो जिसका…
नई समीक्षा : ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) – मधुकर वनमाली सत्यम शिवम सुंदरम ईदगाह, हिन्दुस्तान की कहानी है।वह हिन्दुस्तान जिसकी तहजीब आज खो गई है।वही तहजीब जो बड़ों को इज्जत और…
डॉ कुँवर दिनेश सिंह की दो लघुकथाएं आत्मा का घर “सादा जीवन, उच्च विचार”― बहुत-से महापुरुषों का यही उपदेश रहा है। लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि…
ज़हीर अली सिद्दीक़ी की तीन कविताएं नंगे पांव ‘सड़क’ ख़ासा तप रही रास्ते कांटें भरे नंगे पांव चल पड़े मंज़िल ए उत्साह में सफ़र लम्बा देखकर उलझनें बढ़ती गयीं देखकर…
सुशांत, आखिर क्यों ,सुशांत ! – सलिल सरोज आत्महत्या निस्संदेह में एक जघन्य पाप है। एक आदमी जो खुद को मारता है, उसे इस दुनिया में बार-बार लौटना होगा और…
चीन की खतरनाक महात्वाकांक्षा और भारत सहित अन्य देश …