अभी ख़ून से शेर लिखने हैं हमको— डॉ. उर्मिलेश :: वशिष्ठ अनूप

अभी ख़ून से शेर लिखने हैं हमको— डॉ. उर्मिलेश वशिष्ठ अनूप   परिंदों में कोई फ़िरकापरस्ती क्यों नहीं होती, कभी मंदिर पे जा बैठे, कभी...

संस्मरण : तोतली जुबान वाला हर्ष :: डॉ. शिवम् तिवारी

तोतली जुबान वाला हर्ष  डॉ शिवम् तिवारी  "तातू, तातू, आ गए मेरे तातू" सर पर बेतरतीब बिखरे बाल, बदन पर पुरानी टी-शर्ट एवं अधफटी नेकर...

समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में युवा ग़ज़लकारों का हस्तक्षेप :: डॉ भावना

समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में युवा ग़ज़लकारों का हस्तक्षेप डॉ.भावना  हमारा देश युवाओं का देश है। हर पीढ़ी के पास अपनी सोच और विचार होते हैं,...

अगले जनम फिर आना : सिद्धिनाथ स्मृति – सतीश नूतन

अगले जनम फिर आना : सिद्धिनाथ स्मृति - सतीश नूतन 1982 में गाँव की गझिन गाछ, बरैला ताल पर उड़ते प्रवासी पक्षियों के कलरव, झाल-करताल-हरिकीर्तन...

दुष्यंत पूर्व हिन्दी ग़ज़लकार : ज्ञानप्रकाश पाण्डेय

दुष्यंत पूर्व हिन्दी ग़ज़लकार : ज्ञानप्रकाश पाण्डेय कोई भी घटना अकस्मात नहीं घटती, उसके नेपथ्य में कोई-न-कोई प्रक्रिया बहुत पहले से चल रही होती है।...