विशिष्ट कवि :: डॉ.विमलेंदु सिंह

डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह की चार कविताएं ढेर सारे अक्टूबर  मैं अपने ऊपर का आकाश बदल दूंगा अब, छूट जाएंगी बहुत बातें, यहीं रह जाएंगी,...

विशिष्ट कवयित्री :: प्रभा मजूमदार

संबल (1) मेरे पास सेनाएँ नहीं संबल है जागीरें, धरोहरें, वसीयतनामे नहीं कुछ संकल्प और स्वप्न हैं खेत खलिहान बाग बगीचे मिल कारखाने उद्योग-तंत्र नहीं...

विशिष्ट कवि :: डॉ. महेंद्र मधुकर

पृथ्वी-पत्र तुमने लिखी है पृथ्वी मेरे नाम ! हरियाली उड़ेल दी तुमने नदी-नद के छोर वशवर्ती मेरे पत्ते, वृक्ष सहोदर से बढ़े मेरे साथ !...

विशिष्ट कवयित्री : स्वाति शशि

मैं तुमसे मिलना चाहती हूं मैं तुमसे मिलना चाहती हूं सिर्फ़ एक बार मैं जानना चाहती हूं जवाब अपने बहुत सारे सवालों का मैं तुमसे...