रंगमंच

 नाटक – क्रमिक विकास, प्रयोग और प्रयोजन – वंदना शुक्ल – मार्क्स का अत्यंत प्रसिद्ध कथन है कि अभी तक दार्शनिकों ने दुनिया की व्याख्या की थी, लेकिन सवाल दुनिया को बदलने का है। बदलने का अर्थ तकनीकी विकास (विचारगत/विकास गत और आधुनिकीकरण के सन्दर्भ) से लिया जाये या सामाजिक क्रांति से? जहाँ तक सामाजिक (बदलाव) क्रांति का प्रश्न है इस दौर में या कहें परिवर्तन की प्रक्रिया के तहत अन्यान्य वैचारिक/प्रायोगिक पहलों के साथ साहित्य व कलाओं की सार्थक भागीदारी भी गौरतलब है, इसे नकारा नहीं जा सकता, क्यूँकि…

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रामचंद्र ने दी थियेटर को समृद्धि

अभिनेता रामचंद्र सिंह के जुनून ने इन्हें रंगमंच के मुकाम तक पहुंचाया. बचपन से लेकर युवावस्था तक संर्घषमय जीवन में अभिनय इनके हर क्षण का साथी रहा है। बचपन में एक्टर बनने की चाह थी। फिल्मों में काम करने के षौक ने इन्हें अभिनय में पारंगत किया.देष के विभिन्न थियेटर से जुड़ कर इन्होंने रंगमंच को समृद्धि दी। अभिनय यात्रा के दौरान ये मशहूर नाटककार हबीब तनवीर से जुड़े। इनके निर्देषन में इन्होंने देश-विदेश में एक सौ से अधिक प्रस्तुतियां दी। अभिनय में इनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2016…

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