विशिष्ट कवि :: डॉ पंकज कर्ण
बारिश की पहली फुहार डॉ पंकज कर्ण प्रेम से उपजे जज़्बातों सूरज की किरणों एवं कसमसाते हुए सागर के ज्वार-सा प्रलयकारी समय जब हार जाता है अपनी ही चौखट पर,…
बारिश की पहली फुहार डॉ पंकज कर्ण प्रेम से उपजे जज़्बातों सूरज की किरणों एवं कसमसाते हुए सागर के ज्वार-सा प्रलयकारी समय जब हार जाता है अपनी ही चौखट पर,…
सबसे पहले माँ ब्रज श्रीवास्तव माँ केवल माँ नहीं है सुखद उपस्थिति है किसी जज़्बात का माँ कोई जन्नत नहीं है वह तो खालिस धरती है धरती पर मौजूद घर…
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से ■ शहंशाह आलम बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से बचपन में हम सब कितनी दफ़ा निकल जाते थे…
परछाई अंत तो प्रारंभ में है। सहज कर्म यात्रा, द्वंद्व मुक्त नहीं होती। बीज से- फल-फूल। आसमान में छत नहीं, पेड़ के लिए सूरज होता है। पृथ्वी अनंत काल से-…
खराबियां भी कविताओं में आ जातीं हैं खराबियां भी कविताओं में आ जातीं हैं ताकि सनद रहे खराब लोगों की चालाकियां इस तरह आतीं हैं कविताओं में जैसे कोई राक्षसी…
खुर घर में धान आते ही बैलों के खुर याद आए हल चलाते समय गदबेर में कट चुका था गोहट मारना बाकी था खुर में खून लथपथ था …
दुःख दुःख पानी है जो आँखों से बहता है जिस तरह पानी के कई रास्ते होते हैं दुःख के भी होते हैं घरों की तरफ़ जाते और ये घर कैसे…
पानी वह प्यासा बच्चा दौड़ता हुआ आता है खेल छोड़कर अँजुरी भर पानी पीता है इस सार्वजनिक नल से उसे ओस की तरह पीता है बारिश की तरह पीता…
वायरस जानते हो समय भूमंडलीकरण में जितने हम-सब पास-पास आयें थे उतने ही दूर होते जा रहे हैं इंसान अपने हाथों अपनी सभ्यता को नष्ट करने पे तुला है एक…
मालिनी गौतम ………………………………………………….. कहा-अनकहा कुछ आँसू अपने सर्वाधिक प्रिय व्यक्ति से भी छुपा लिए गये, निविड़ अंधकार के प्रगाढ़ क्षणों में अधरों पर फैली हल्की स्मित रेख के पीछे वे…