श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / हिंदी ग़ज़ल का युवा चेहरा अमन :: अनिरुद्ध सिन्हा

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / हिंदी ग़ज़ल का युवा चेहरा अमन :: अनिरुद्ध सिन्हा रोक सकते हो तो रोको मजहबी तकरार को खून यूँ बहता रहा तो ये सदी मर जाएगी   नफ़रतों की तीरगी फैली हुई है हर तरफ प्यार के दीपक जलें तो तीरगी मर जाएगी बहुत से दशकों तक विश्व शांति के लिए,सामाजिक हित,प्राकृतिक विधान और सामाजिक अनुबंध की सामान्य धारणा के घटक के रूप में राजनीति परिभाषित होती रही। अपनी सादगी और मानवी चिंतन पर आस्था के कारण लोगों को आकर्षित भी करती रही।यह वह नींव…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमन के नाम ग़ज़ल :: के.पी.अनमोल

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमन के नाम ग़ज़ल :: के.पी.अनमोल कैसा ग़ज़ब है उसने किया राम राम राम आते ही कह दिया है ‘विदा’ राम राम राम अच्छा नहीं हुआ है मगर हो गया है बस जो हो गया बुरा ही हुआ राम राम राम किरदार बस जवान हुआ था अभी-अभी परदा अभी है कैसे गिरा राम राम राम राही ज़रा-सी देर रुका और चल दिया सब देते रह गये हैं सदा राम राम राम भीतर की आह करती रही हाय हाय हाय बाहर से दर्द कहता रहा राम…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / एक भाई का चले जाना :: गरिमा सक्सेना

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / एक भाई का चले जाना :: गरिमा सक्सेना अमन चाँदपुरी २०-२१ साल का एक लड़का, कोई नहीं सोचता होगा कि लेखन में इस उम्र में कोई इतना परिपक्व व साहित्य के प्रति गम्भीर हो सकता है। अमन से मेरा पहला परिचय दोहा दंगल समूह में दोहा रत्न प्रतियोगिता के दौरान हुआ। वर्ष था २०१७ अमन ने जिस बारीकियों के साथ मेरे दोहों पर टिप्पणियां की वह अद्भुत था। जितना मैं उससे प्रभावित थी शायद उतना ही वह भी। इसके बाद उसका और मेरा साहित्यिक संबंध…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमनुआ और मैं :: राहुल शिवाय

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमनुआ और मैं :: राहुल शिवाय अमनुआ , यही कहता था मैं उसे, आखिर था भी मेरा लाडला.. अमन से मेरी पहली पहचान उसकी लघुकथाओं और दोहे के माध्यम से हुई थी.. मात्राओं की गड़बड़ी, भाव का बिखराव, पर स्वयं को स्थापित करने की एक चाह .. पहली नज़र में मैं इन्हें ही देख पाया था.. अमन से सात वर्षों के संबंध में बहुत सारे यादगार संस्मरण हैं.. मुझे याद है अरुणिमा सिन्हा( जो उसके ही जिले की थी) के एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / दोहे :: हरिनारायण सिंह हरि

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / दोहे :: हरिनारायण सिंह हरि अमन शांति की खोज में, गया स्वर्ग के द्वार । यहाँ निरंतर रो रही, कविता जार-बेजार । ऐसे निष्ठुर क्यों बने, अमन!गये क्यों भाग । यहाँ अभागा रो रहा, सुबुक-सुबुक अनुराग । सबके प्रिय तुम थे बने, सबके जिगरी यार । अमन! तुम्हारे बिन यहाँ,फीके सब त्योहार । यद्यपि परिचय था नहीं, भले बहुत थे दूर । तुमको रचता देख-सुन, मैं भी था मगरूर । दोहा मंथन में अमन हम हैं तेरे साथ । इतनी जल्दी चल दिये, अरे, छुड़ाकर हाथ…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ यादें :: सतरूपा

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ यादें :: सतरूपा अभी 23 सितम्बर को युवा कवि अमन चांदपुरी पुस्तकमेला परिसर के मंच पर #गीतिका सौरभ सम्मान से सम्मानित हुए थे। असमय लगातार बारिश से सांस्कृतिक पंडाल परिसर थोड़ा बहुत अस्तव्यस्त था बावजूद समर्पित युवा से लेकर वरिष्ठ साहित्यकार सभी की मौजूदगी खूब रही। उसी दिन ही दूसरे पंडाल में युवाओं का पोएट्स हाऊस कार्यक्रम चल रहा था, मै वहां पहुंच चुकी थी। मंच की व्यवस्था , गीली कुर्सियों आदि को ठीक ठाक करके कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के तौर पर…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / यादें जो शेष रह गईं :: स्मिता श्री

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / यादें जो शेष रह गईं :: स्मिता श्री हम भावनाओं के अधीन बहुत कुछ करना चाहते हैं। अपनी तरफ से, सही है। पर क्या पता हमारी श्रद्धांजलि पहुंचती भी है? पता नहीं कोई ईश्वर चले जाने के बाद पास रखता भी है? कोई आत्मा शरीर के बाद भी शांति की तलाश पूरी करती है क्या? कह नहीं सकती, पर यह मुझे अच्छी तरह से पता है कि गये हुए की भरपाई कभी संभव नहीं है। न ही हमेशा के लिए चले जाने से पास दूर…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ ग़ज़ल :: अवधेश प्रसाद सिंह

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी/ ग़ज़ल :: अवधेश प्रसाद सिंह कौन कहता आदमी को काल कोई खा रहा ले गया जो कल अमन को क्या किसी को भा रहा कर रहा बदनाम मच्छर डेंगू को ही सब यहां क्या किसी उपचार का भी शोध कोई ला रहा हर किसी का दिल दहलता है अमन की मौत से दोष क्या था उस बिचारे का नहीं बतला रहा हर किसी को बाल बच्चे की फिकर तो है यहां है सभी संतान हम सब क्या समझ वह पा रहा गर नहीं तो कौन पूजेगा…

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यादों में परिचय :: अमन चाँदपुरी

यादों में परिचय :: अमन चाँदपुरी मूल नाम : अमन सिंह जन्मतिथि : 25 नवम्बर 1997 पिता : श्री सुनील कुमार सिंह माता : श्रीमती चंद्रकला सिंह शिक्षा : बी. ए. लेखन विधाएँ : दोहा, ग़ज़ल, गीत, हाइकु, क्षणिका, मुक्तक, कुंडलिया, समीक्षा, लघुकथा एवं मुक्त छंद कविताएँ आदि सम्पादित पुस्तक : ‘दोहा दर्पण‘ प्रकाशन : विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा वेब पर विभिन्न विधाओं में हज़ारों रचनाएँ प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकें : अमन तुम्हारी चिठ्ठियाँ (प्रेस में) (समवेत संग्रह) : 1- ‘कारवान-ए-ग़ज़ल ‘ 2- ‘दोहा कलश’ 3- ‘यादों के दरीचे’…

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श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / शब्दों के फूल : कैलाश झा किंकर

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / शब्दों के फूल : कैलाश झा किंकर उम्र छोटी थी मगर साहित्य में रमता था मन। भेंट लखनऊ में हुई थी आपसे गत वर्ष ही इतनी जल्दी इस जहां से कैसे कर सकते गमन । उम्र थी बाईस की पर प्रौढ़ दोहाकार थे शब्द की ताकत बहुत थी आपमें था सच कथन। आपकी ग़ज़लों की जो तासीर थी अनमोल थी कौशिकी परिवार कैसे दुख करेगा यह सहन। आपका जाना हमारे बीच से घटना बुरी मन टिका है आप पर कमजोर अब लगता है तन। एक मच्छर…

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