विशिष्ट ग़ज़लकार :: अनामिका सिंह

अनामिका सिंह की दस ग़ज़लें (1) बदनाम जो गली वहाँ जाते भले हैं लोग सुनकर दबाते उँगलियाँ दाँतों तले हैं लोग इक शख़्सियत महज़ जिन्हें है देह भर हुई, किरचें…