दूर की कौड़ी :: सुरेश सौरभ

दूर की कौड़ी सुरेश सौरभ ठाकुर दीनानाथ बड़े कृपालु स्वभाव वाले आदमी थे। उनके दरवाजे कोई भी याचक पहुंचता, तो कुछ न कुछ जरुर उसे देकर सान्त्वना देते। किसी को…

पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व :: देवेंद्रराज सुथार

पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व देवेन्द्रराज सुथार   सुरेश सौरभ द्वारा संपादित ‘पावन तट पर’ साझा लघुकथा संग्रह आस्था और अंधविश्वास के मध्य विद्यमान सूक्ष्म विभाजक रेखा…

विशिष्ट ग़ज़लकार :: अनामिका सिंह

अनामिका सिंह की दस ग़ज़लें (1) बदनाम जो गली वहाँ जाते भले हैं लोग सुनकर दबाते उँगलियाँ दाँतों तले हैं लोग इक शख़्सियत महज़ जिन्हें है देह भर हुई, किरचें…

साये में धूप’ के पचास साल और दुष्यंत कुमार की ग़ज़लधर्मिता : डॉ.अविनाश भारती

साये में धूप’ के पचास साल और दुष्यंत कुमार की ग़ज़लधर्मिता डॉ. अविनाश भारती दुष्यंत कुमार की कालजयी कृति ‘साये  में धूप’ के प्रकाशन के पचास वर्ष पूरे हो चुके…

विशिष्ट कवि : दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार की दो कविताएं   गांधी के जन्म दिन पर मैं फिर जन्म लूंगा फिर मैं इसी तरह आऊंगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की…

विशिष्ट ग़ज़लकार : दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार की दस ग़ज़लें : 1 मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ, वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ।   एक जंगल है तेरी आँखों में, मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ।  …

दुष्यंत के सीने में जलती आग : डॉ अभिषेक कुमार

दुष्यंत के सीने में जलती आग  डॉ अभिषेक कुमार   अगर वास्तव में तुम दुष्यंत के सीने में जलती आग को महसूस करना चाहते हो तो कभी जाकर देखो उस…