समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में जन-मुक्ति की चेतना :: डॉ.अविनाश भारती
समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में जन-मुक्ति की चेतना – डॉ.अविनाश भारती हिन्दी ग़ज़ल का विकास एक सांस्कृतिक संक्रमण की कथा है। अरबी-फारसी परंपरा में जन्मी यह विधा जब उर्दू में विकसित…
समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में जन-मुक्ति की चेतना – डॉ.अविनाश भारती हिन्दी ग़ज़ल का विकास एक सांस्कृतिक संक्रमण की कथा है। अरबी-फारसी परंपरा में जन्मी यह विधा जब उर्दू में विकसित…
साधना रानी की नौ कविताएं मौन की वह एक बूँद सुनो ना ! तुम चमकते रहना जैसे अंजन में छिपा कोई चिर-संवरण दीपक, जो जलता है मौन, पर दिखता नहीं…
***** सुभाष वसिष्ठ के पांच गीत मन बहुत बीमार आज मन है सच बहुत बीमार बेतरह ख़ामोश बिस्तर चाय या अख़बार दोपहर हो शाम आई सुबह छाई है अभी तक…
बिहारी बोलियों की लोक – कथाओं का अध्ययन – डाॅ शान्ति कुमारी डॉ. ग्रियर्सन ने भोजपुरी और मैथिली का अध्ययन बिहारी भाषा के अंतर्गत किया था । डॉ ० ग्रियर्सन…
1. फूल-फलों की चाहत वाली इस दुनिया में हम पत्ते हैं हमें कौन पूछेगा साहब रंग-बिरंगे फूलों जैसा हमने भी पाया है इक मन लेकिन नहीं भाग्य में जैसे…
मधुरता और मिठास के साथ मुद्दों पर लिखा गया गीत जहाँ नहीं उजियार योगेंद्र प्रताप मौर्य लिखित नवगीत का नया संग्रह है. इससे पहले नवगीत की एक तथा बाल कविताओं…
दूर की कौड़ी सुरेश सौरभ ठाकुर दीनानाथ बड़े कृपालु स्वभाव वाले आदमी थे। उनके दरवाजे कोई भी याचक पहुंचता, तो कुछ न कुछ जरुर उसे देकर सान्त्वना देते। किसी को…
बाबू होने का मतलब – महेश कुमार केशरी अगर आप सफेद हाथी हैं और आप महामक्खी चूस आदमी हैं। और आपके आसपास नौकरों की…
शून्य एक दिन, तुमने कहा था- मैं शून्य हूँ- तुम अंक हो गणित की भाषा में – एक पिछड़ा प्रसंग हो संख्या के चक़्क़र में ऐसा उलझा कि- ज़िंदगी…
अनीता रश्मि की चार कविताएं – सपने के भीतर उसके भीतर है सपना सपने के अंदर वह कभी सपनों में जागती कभी सपनों से जागती सपने में उसके है वह…