दूर की कौड़ी :: सुरेश सौरभ
दूर की कौड़ी सुरेश सौरभ ठाकुर दीनानाथ बड़े कृपालु स्वभाव वाले आदमी थे। उनके दरवाजे कोई भी याचक पहुंचता, तो कुछ न कुछ जरुर उसे देकर सान्त्वना देते। किसी को…
दूर की कौड़ी सुरेश सौरभ ठाकुर दीनानाथ बड़े कृपालु स्वभाव वाले आदमी थे। उनके दरवाजे कोई भी याचक पहुंचता, तो कुछ न कुछ जरुर उसे देकर सान्त्वना देते। किसी को…
बाबू होने का मतलब – महेश कुमार केशरी अगर आप सफेद हाथी हैं और आप महामक्खी चूस आदमी हैं। और आपके आसपास नौकरों की…
शून्य एक दिन, तुमने कहा था- मैं शून्य हूँ- तुम अंक हो गणित की भाषा में – एक पिछड़ा प्रसंग हो संख्या के चक़्क़र में ऐसा उलझा कि- ज़िंदगी…
अनीता रश्मि की चार कविताएं – सपने के भीतर उसके भीतर है सपना सपने के अंदर वह कभी सपनों में जागती कभी सपनों से जागती सपने में उसके है वह…
पावन तट पर आस्था और विसंगति का द्वंद्व देवेन्द्रराज सुथार सुरेश सौरभ द्वारा संपादित ‘पावन तट पर’ साझा लघुकथा संग्रह आस्था और अंधविश्वास के मध्य विद्यमान सूक्ष्म विभाजक रेखा…
अनामिका सिंह की दस ग़ज़लें (1) बदनाम जो गली वहाँ जाते भले हैं लोग सुनकर दबाते उँगलियाँ दाँतों तले हैं लोग इक शख़्सियत महज़ जिन्हें है देह भर हुई, किरचें…
साये में धूप’ के पचास साल और दुष्यंत कुमार की ग़ज़लधर्मिता डॉ. अविनाश भारती दुष्यंत कुमार की कालजयी कृति ‘साये में धूप’ के प्रकाशन के पचास वर्ष पूरे हो चुके…
दुष्यंत कुमार की दो कविताएं गांधी के जन्म दिन पर मैं फिर जन्म लूंगा फिर मैं इसी तरह आऊंगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की…
दुष्यंत कुमार की दस ग़ज़लें : 1 मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ, वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ। एक जंगल है तेरी आँखों में, मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ। …
दुष्यंत के सीने में जलती आग डॉ अभिषेक कुमार अगर वास्तव में तुम दुष्यंत के सीने में जलती आग को महसूस करना चाहते हो तो कभी जाकर देखो उस…