पर्वतों और घाटियों का सम्मोहन वृतांत कौसानी कथा
- डॉ.भावना
यहाँ पर्वत बोलते हैं (कौसानी-कथा) राहुल शिवाय बहुचर्चित पुस्तक है यह एक ऐसी किताब जो आपको अपने सम्मोहन में बांध दे और आप पृष्ठ दर पृष्ठ पलटते हुए स्वयं को कौसानी में महसूस करने लगें। मेरा हाल कुछ ऐसा ही है।मैं फिलहाल राहुल शिवाय की आंखों से कौशानी देख रही हूँ ।अबतक मैं राहुल शिवाय की गीतों और गज़लों की प्रशंसक रही हूँ। इस यात्रा-वृत्तान्त को पढने के बाद असमंजस में हूँ। इस पुस्तक का प्रवाह कुछ ऐसा है जैसे कॉमा, फुलस्टाप बोल पड़े हों । इस पुस्तक का छोटा अंश आपके लिए-
कौसानी जाने की बात सुनते ही मेरे भीतर का पाठक, कवि और किशोर छात्र; तीनों एक साथ जाग उठे हैं।
मैं सोच रहा हूँ कि जिस धरती ने पंत को जन्म दिया, वह कैसी होगी? वे पर्वत कैसे होंगे, जिन्हें देखकर उनकी कविताएँ जन्मीं? वे बादल, वे चीड़ के वृक्ष, वे घाटियाँ; क्या आज भी वैसे ही होंगे? क्या प्रकृति अब भी उसी तरह किसी संवेदनशील मन में कविता का संचार करती होगी? मैं उस पावस को भी देखना चाहता हूँ, जिसके लिए पंत लिखते हैं- “गिरि का गौरव गाकर झर-झर / मद में नस-नस उत्तेजित कर / मोती की लड़ियों से सुंदर / झरते हैं झाग भरे निर्झर!”
खैर, अभी तो पता नहीं, क्या देख पाऊँगा, क्या नहीं। लेकिन जो अभी देखना है, वह है जाने की तैयारी। जो चल भी रही है। शारदा दी बैग में खाना रख रही हैं। मुनमुन भी अपना काम करके पानी की बोतल भर रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कुछ छूट न जाए। बीच-बीच में हँसी के फव्वारे भी छूट रहे हैं। नीशू भी मदद कर रहा है और यात्रा का आनन्द यहीं से प्रारम्भ हो चुका है।
मैंने भी मन ही मन एक और तैयारी कर ली है। तय किया है कि इस बार केवल यात्रा नहीं करूँगा, उसे दर्ज भी करूँगा। डायरी के इन पन्नों को, यदि सम्भव हुआ, तो एक यात्रा-वृत्तान्त का रूप दूँगा।
हालाँकि यह निर्णय लेते ही एक संकोच भी घेर रहा है। कारण है- राहुल नाम… और ऐसा इसलिए क्योंकि यह नाम सिर्फ़ नाम नहीं है। हिन्दी साहित्य में यात्रा-वृत्तान्त का पर्याय है। आप समझ ही गये होंगे, मैं किनकी बात कर रहा हूँ। उन्होंने जितना देखा, जितना जिया और जितना लिखा, वह किसी एक जीवन का कार्य नहीं लगता। ऐसे में राहुल नाम धारण करने वाला यह दूसरा राहुल यदि उनके लिखे की इकाई भर तक भी पहुँच सके, तो अपने नाम को सार्थक मान सकता है।
कहना न होगा कि यह एक जरूरी किताब जिसे सभी को अवश्य पढ़ना चाहिए।
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पुस्तक- यहां पर्वत बोलते हैं (कौशानी कथा)
विधा – यात्रा-वृत्तान्त
लेखक – राहुल शिवाय
समीक्षक – डॉ.भावना
प्रकाशन – श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई, दिल्ली
