आओ मनाएं हैप्पी वाली हेल्दी होली

आओ मनाएं हैप्पी वाली हेल्दी होली

                                              – प्रियंका जायसवाल, बाल साहित्यकार

एक तो परीक्षा की झंझट से मुक्ति और दूसरा होली का त्योहार। बच्चों के तो खुशी के मारे पैर जमीन पर ही नहीं पड़ रहे थे। रौनक व मित्रमंडली भी इसी उधेड़बुन में लगे थे कि इस बार जोरदार होली कैसे मनाया जाए? ‘‘हां, पर हमारे मोहल्ले वाले तो रंगों के नाम से ही ऐसे डर रहे हैं, जैसे किसी ने भूत देख लिया हो।’’ रजत ने कहा, ‘वे भीं क्या करें? याद है न, ‘‘चिंकी की आंखें कैसे रंग पड़ जाने के कारण खराब हो गयी।’’ और राजू के हाथ भी इतनी बुरी तरह से छिल गए थे रंगों के कारण कि महीनों इलाज कराना पड़ा था। सच में कितना केमिकल मिला रहता है इन रंगों में!!! ‘‘भला इतनी तकलीफ झेलकर कौन खेलना चाहेगा होली?’’सभी ने समवेत उदास स्वर में कहा। तभी ईशा ने पूछा कि आखिर होली की पहचान रंगों से ही क्यों है? बिट्टू ने कहा सच में हमने तो कभी ऐसा सोचा ही नहीं। रौनक ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि अरे! दोस्तों कल मेरे माधवन मामा आ रहे हैं। इस बार वे होली हमारे साथ ही मनाएंगे। मेरे मामा केमिकल साइंटिस्ट है। तो क्यों ना हम उनसे ही पूछें? सभी ने चहकते हुए हामी भरी। रौनक बेसब्री से माधवन मामा के आने का इंतजार करने लगा। जैसे ही पापा ने उससे पूछा कि रौनक! एयरपोर्ट चलोगे मामा को लाने? उसकी तो बांछे खिल गईं। तुरंत लपक कर गाड़ी में जा बैठा। उनके पहुंचने के पहले माधवन मामा की फ्लाइट आ चुकी थी। मामा को देखते ही रौनक दौड़कर उनके गले लगा। मामा ने उसके पीठ पर थपकी देते हुए पूछा डियर जीनियस कैसे हो? चेहरे पर ये उदासी क्यों? रौनक ने कहा, मामा समझ में ही नहीं आ रहा है कि इस बार होली कैसे मनाएं? सो मेरी मित्रमंडली आपसे मिलना चाहते हैं। मामा ने रौनक के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि बस इतनी सी बात! मैं मिलूंगा तुम्हारी मित्रमंडली से। नियत समय पर मित्रमंडली रौनक के घर पहुंची। सबने हाथ जोड़कर मामा का अभिभावदन किया। मामा ने बड़े प्यार से कहा कि डियर लिटिल फ्रेंडस !गुड टू सी यू। हे वेयर इज योर स्माइल? वेट…योर स्माइल इज विथ मी। गिम मी योर हैंड प्लीज। माधवन मामा ने सभी बच्चों को चॉकलेट देते हुए कहा चियर अप चैंम्पस! वी विल सेलिबे्रट हेल्दी-हैप्पी एण्ड ग्रैंड होली। बच्चे जोश से भर उठे। उनका सारा झिझक खत्म हुआ। और वो पूछ पड़े मामाजी आप तो जाने-माने वैज्ञानिक है। ये बताएं कि ‘होली’ रंग से ही क्यों मनाया जाता है? देखें ना रंग के कारण हमारे दोस्तों को कितनी तकलीफ पहुंची है। मम्मी-पापा भी हमें रंगों का इस्तेमाल करने से मना करते हैं? ऐसे में हम कैसे मनाए होली? बच्चों की जिज्ञासा और उनकी संवेदना को देखकर मामाजी दंग रह गए। उन्होंने कहा बच्चों! होली का त्योहार ऐसे समय में मनाया जाता है जब ठंड खत्म हो रही होती है, और गर्मी ‘ाुरू होती है। मौसम में बदलाव के कारण अनेक तरह की बीमारियां होती हैं। उन बीमारियों से बचने के लिए और ‘ारीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने के लिए हमारे पूर्वजों ने एक उपाय ढूंढा। उन्होंने पलाश के फूलों को पानी में उबाल कर उसे एक-दूसरे के ‘ारीर  को भिंगोने की परंपरा की ‘ाुरूआत की। चूंकि पलाश के फूल में कुछ ऐसे औषधीय गुण होते हैं जिससे हमारे ‘शरीर के अंदर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सो इस तरह ‘रंग’ के पर्व होली की शुरूआत हुईं। जिसे हम आज भी खेलते है। लेकिन प्राकृतिक तरीके से नहीं। आज के लाल-पीला-नीला-हरा आदि रंग व गुलाल टिटेनियम, वैनाडियम, क्रोमियम, मैगनेट, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर, जिंक, सिल्वर जैसे अनेक केमिकल्स से मिलकर बना होता है। जो हमारे ‘ारीर, त्वचा, आंख और सांस के लिए काफी हानिकारक होता है। मामाजी की बात सुनकर माहौल में गंभीरता छा गईं। नन्हीं तान्या रूआंसी होकर बोली, मामाजी तो इसका मतलब यह है कि हमें होली में रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मामाजी ने कहा! मेरी प्यारी गुड़िया किसने कहा? इस बार हम सभी जमकर होली खेलेगें। चुनमुन बीच में बोला मगर कैसे? प्राकृतिक रंगों से। मोनू जिज्ञासावश पूछ पड़ा, मामाजी देखो हमारे कॉलोनी में क्या आपको पेड़ दिख रहे हैं? सिर्फ उंची-उंची बिल्डिगंस ही हैं। कहां से आएंगे पलाश के फूल? बच्चों की जागरूकता व चिंता को देखकर मामाजी भावुक हो उठे। और बोले मैं तुम सभी को सीखाता हूं प्राकृतिक रूप से रंग बनाना। फिर उन्होंने अपने बैग से अनार के छिलके, मेंहदी के पत्ते, टेसू व परिजात के फूल, आंवला व कुछ हब्र्स  निकाला। फिर एक-एक करके रंग बनाने की विधि बताना ‘शुरू किए…

पीला रंग
बच्चों अनार के छिलकों को रात भर भिगों दो। फिर उसे उबालने से बन जाएगा पीला रंग। इसके अलावा थोड़े से केसर में पानी मिलाकर भी पीला रंग बना सकते हो। सूखे पीले रंग बनाने के लिए बेसन या आटा में हल्दी मिला लो। इसमें इसमें थोड़ा सा चंदन पाउडर मिलाकर सुगंधित भी बना लों।

नीला रंग
नीले रंग के लिए नील को पानी में मिला सकते हैं।

हरा रंग
मेंहदी की सूखी पत्तियों का पाउडर बनाकर हरा रंग बना सकते हैं। इतना ही नहीं गुलमोहर की सूखी पत्तियों का पाउडर भी हरा रंग देता है।

संतरी रंग
मेंहदी में पानी मिलाकर इस्तेमाल करों तो बच्चों संतरी रंग बन जाएगा।

जामुनी रंग
जामुनी रंग बनाने के लिए इस पोटाशियम परमानगेनेट एक बड़ा चम्मच एक टब पानी डाल दो तो तैयार है जामुनी रंग।

गुलाबी रंग
चुकंदर के टुकड़े काटकर उन्हें थोड़े से पानी में अगर उबाला जाए तो सुंदर गहरा गुलाबी रंग मिलेगा।

गहरा भूरा रंग
चाय, कॉफी या कत्था उबालकर गहरा भूरा रंग बन जाएगा।

काला रंग
लोहे की कड़ाही में सूखे आंवले उबालकर काला रंग प्राप्त कर सकते हो।
तो देखो तैयार हो गया ना आपके होली का रंग। आओ अच्छाई पर बुराई की जीत के पर्व होली पर हम सभी केमिकल वाले रंगों को बॉय-बॉय कहते हुए प्राकृतिक रंग से हैप्पी-हेल्दी व ग्रैंड होली मनाने का संकल्प लें।
आप सभी को हैप्पी व हेल्दी होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!
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भारत में होली के रंग
होली के लाल-पीले-नीले-गुलाबी रंगों के तरह की यह त्योहार देशभर में अलग-अलग अंदाज से मनाया जाता है। जिसकी एक झकल…
फगुआ
बिहार में वसंत पंचमी के बाद होली के गीत गाए जाते हैं। कुछ लोग इन गीतों को  फाग कहते हैं। लेकिन अंग प्रदेश में इसे फगुआ कहा जाता है। गुलाल लगाकर हर घर के दरवाजे पर घूमकर फाग गाया जाता है।
लठमार होली
श्रीकृष्ण नंदगांव के थे और राधा बरसाने की थीं। प्राचीन परंपरा को निभाते हुए नंदगांव से युवकों की टोलियां बरसाने आती हैं और वहां की महिलाओं पर रंग डालती हैं। महिलाएं युवकों पर लाठियां बरसाती हैं, पर कोई घायल नहीं होता।
भगोरिया
यह मध्य प्रदेश के धार, झबुआ, खरगोन आदि क्षेत्र का उत्सव है, जो होली का ही एक रूप है। यहां के आदिवासी लोग इस उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इस अवसर पर हाट-बजार में मेले के रूप में होली का रंग पसरा होता है। यहां नवयुवक व युवतियां अपने जीवन-साथी का चुनाव करते हैं।
गीत बैठकी
उत्तराखंड के कुमाउं मंडल के नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली पर गीत बैठकी का आयोजन किया जाता है। बैठकों में राग-रागनियों के साथ मीरा बाई और मुगल बादशाह बहादुर ‘ााह जफर की रचनाएं सुनने को मिलती हैं। लोग बड़ी उत्साह के साथ होली के गीत गाते है।
दोल यात्रा
दोल यात्रा बंगाल में होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं ‘ांख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं। सुबह प्रभात-फेरी निकाली जाती है। दोल का अर्थ झूला होता है। अतः झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्तियां रखकर कीर्तन किया जाता है। गुलाल और रंग से होली खेली जाती है। ‘ाांतिनिकेतन में यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
शिमगो
गोवा के शिमगो उत्सव में लोग वसंत का स्वागत करने के लिए रंगों से खेलते हैं। होली के दिन पणजी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और जुलूस निकाला जाता है।
याओसांग
मणिपुर में फागुन पूर्णिमा के दिन याओसांग पर्व मनाया जाता है, जो होली से मिलता-जुलता है। याओसांग का अर्थ छोटी सी झोंपड़ी है, जो फागुन पूर्णिमा के दिन नदी सरोवर के तट पर बनाई जाती है। इसमें चैतन्य महाप्रभु की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजन के बाद झोपड़ी को जला दिया जाता है। याओसांग की राख को लोग अपने मस्तक पर लगाते हैं। बच्चे घर-घर जाकर चावल और सब्जियां एकत्र करते हैं। इस सामग्री से सामूहिक भोज का आयोजन होता है।
रंग पंचमी
महाराष्ट्र में होली के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यह रंग सूखा गुलाल होता है। राजस्थान के जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों का आयोजन होता है और रंगों को उड़ाया जाता है। जयपुर में विदेशी पर्यटक भी होली के रंगों का आनंद हाथी पर बैठकर उठाते हैं। मालवा में बैंड बाजे के साथ होली का जुलूस निकालने की परंपरा है।
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शालीनता से खेलें होली
– होली खेलने से पहले अपने आपको पूरी तरह सुरक्षित कर लें। त्वचा पर मॉस्चराइजर लगांए। सरसों या नारियल का तेल भी लगा सकते हैं।
– गुब्बारों से चोट लग सकती है, इसकी अपेक्षा पिचकारी से खेलें।
–  गीले फर्श पर ना दौड़ें। चिकने फर्श पर गिरने से हर वर्ष बहुत से बच्चों की हड्डियां टूटती हैं।
– जानवरों पर रंग न डालें, उन्हें एलर्जी हो सकती है। इस बात ध्यान रखते हुए दूसरे बच्चों को भी ऐसा करने से रोंके।
– बुजुर्गों व बीमारों की सहूलियत का ध्यान रखें।

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